ग्रामीणों के अनुसार बतौली से बगीचा तक करीब 16 किलोमीटर लंबी नई सड़क के निर्माण के लिए लगभग 33 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिलने के बाद अप्रैल माह में कार्य शुरू किया गया था। हालांकि कई महीने बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य अपेक्षित गति से नहीं हो पाया है। अधिकांश स्थानों पर केवल पुरानी डामर सड़क उखाड़ने और सड़क किनारे शोल्डर की सफाई का कार्य ही किया गया है, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
सड़क पर गहरे गड्ढों से बढ़ रहा हादसों का खतरा
बतौली-बगीचा मार्ग के लगभग दो किलोमीटर हिस्से की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय पहले इसी मार्ग पर ट्यूशन पढ़ने जा रहे एक छात्र की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बावजूद सड़क की सुरक्षा और मरम्मत को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
धूल से लोगों का जीना हुआ मुश्किल
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा सड़क पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। भारी वाहनों के गुजरने के बाद उड़ने वाली धूल के कारण कुछ समय तक सड़क दिखाई देना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार ग्रामीण स्वयं पाइप लगाकर सड़क पर पानी डालते हैं ताकि धूल से राहत मिल सके।
मरम्मत कार्य पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि पेच रिपेयरिंग के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई है। गड्ढों में गिट्टी भरने के बावजूद सड़क की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य और रखरखाव में लापरवाही का आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग भी की है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए, नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया जाए तथा जर्जर हिस्सों की तत्काल मरम्मत की जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्रवासी जनआंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।