खामोश क्यों है सरगुजा प्रेस क्लब?

खामोश क्यों है सरगुजा प्रेस क्लब?


  • ​सरगुजा प्रेस क्लब: पत्रकारों की आवाज या अध्यक्ष की निजी दुकान?
  • ​दिशाहीन हुआ सरगुजा प्रेस क्लब; क्या अब खत्म हो चुका है पत्रकारों का यह संगठन?
  • ​अधिकारियों को गुमराह कर अपनी 'रोटी सेंक रहे' सरगुजा प्रेस क्लब के अध्यक्ष!
  • ​खत्म हुई साख,गुमनाम हुई पहचान: क्या सरगुजा प्रेस क्लब का वजूद अब सिर्फ नाम का है?
  • खामोश होता सरगुजा प्रेस क्लब? सदस्यता, पारदर्शिता और सक्रियता पर उठ रहे गंभीर सवाल
  • ताला, तुगलकी फरमान और 52 सदस्यों की सीमा पर उठे सवाल, पत्रकारों में बढ़ रहा असंतोष

अंबिकापुर। कभी सरगुजा के पत्रकारों की एकजुट आवाज माना जाने वाला सरगुजा प्रेस क्लब इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। जिले के कई पत्रकारों का आरोप है कि क्लब अब पत्रकारों के साझा मंच के बजाय कुछ लोगों तक सिमटकर रह गया है। सदस्यता, पारदर्शिता और संगठन की सक्रियता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

आरोप है कि प्रेस क्लब भवन अधिकांश समय बंद रहता है। पत्रकारों का कहना है कि जिस भवन में पत्रकारों के लिए बैठकें, संवाद और पत्रकार हितों के कार्यक्रम होने चाहिए, वहां अक्सर ताला लटका मिलता है। इससे बाहर से आने वाले पत्रकारों सहित स्थानीय पत्रकारों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

सबसे बड़ा विवाद सदस्यता को लेकर सामने आ रहा है। कई पत्रकारों का आरोप है कि वर्तमान अध्यक्ष केवल 52 सदस्यों को ही प्रेस क्लब का सदस्य मानते हैं, जबकि सरगुजा जिले में विभिन्न समाचार पत्रों, न्यूज चैनलों और डिजिटल मीडिया से जुड़े बड़ी संख्या में पत्रकार वर्षों से सक्रिय हैं। उनका कहना है कि नए पत्रकारों को सदस्यता देने के लिए न तो कोई स्पष्ट नियम सार्वजनिक किए गए हैं और न ही कोई पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

पत्रकारों का यह भी कहना है कि पूर्व अध्यक्षों के कार्यकाल में प्रेस क्लब नियमित रूप से सक्रिय रहता था। पत्रकारों के हित में कार्यक्रम, सम्मान समारोह, प्रशिक्षण, चर्चा और विभिन्न सामाजिक गतिविधियां आयोजित होती थीं। लेकिन वर्तमान कार्यकाल में ऐसी गतिविधियां लगभग समाप्त हो गई हैं, जिससे संगठन की पहचान कमजोर होती जा रही है।

आरोप यह भी हैं कि प्रेस क्लब की ओर से प्रशासन और विभिन्न विभागों के समक्ष यह संदेश दिया जाता है कि वही पूरे जिले के पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि बड़ी संख्या में सक्रिय पत्रकार स्वयं को इस संगठन से अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। असंतुष्ट पत्रकारों का कहना है कि यदि प्रेस क्लब वास्तव में पूरे सरगुजा के पत्रकारों का संगठन है तो सदस्यता प्रक्रिया, संविधान, सदस्य सूची, चुनाव प्रक्रिया और आय-व्यय का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

अब जिले के पत्रकारों के बीच यह मांग तेज हो रही है कि प्रेस क्लब में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल की जाए, पात्र पत्रकारों को समान अवसर के साथ सदस्यता दी जाए और संगठन को फिर से सभी पत्रकारों का साझा मंच बनाया जाए।

सीमाएं (अधिकार नहीं हैं): 

  • यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि प्रेस क्लब कोई सरकारी या वैधानिक (Regulatory) संस्था नहीं है प्रेस क्लब के पास किसी को सीधे पत्रकार के रूप में मान्यता (Accreditation) देने का अधिकार नहीं होता। मान्यता छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग द्वारा दी जाती है।
  • यह किसी भी गैर-कानूनी या असंवैधानिक गतिविधि को करने की छूट नहीं देता।

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