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RTI में सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच कई लोगों को अलग-अलग तिथियों में भुगतान किया गया। इनमें अस्पताल से जुड़े कर्मचारी जैसे वार्ड बॉय, स्टाफ नर्स, डेटा ऑपरेटर और चिकित्सक शामिल हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे नाम भी सूची में दर्ज हैं, जिनका अस्पताल से प्रत्यक्ष संबंध स्पष्ट नहीं है।
दस्तावेजों में कई मामलों में भुगतान के पीछे कार्य का स्पष्ट विवरण, स्वीकृति प्रक्रिया और संबंधित फाइल रिकॉर्ड का अभाव भी देखा गया है। कुछ प्रविष्टियों में एक ही व्यक्ति को अलग-अलग तिथियों पर बार-बार राशि जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है, जिससे वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी सामग्री, सेवा या दवा की खरीदी के लिए भुगतान अधिकृत सप्लायर या पंजीकृत फर्म के माध्यम से किया जाना अनिवार्य होता है। लेकिन RTI से सामने आए तथ्यों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जो गंभीर वित्तीय उल्लंघन की ओर संकेत करता है।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल वित्तीय अनियमितता बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला बन सकता है।
फिलहाल, संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।

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