- बेरोजगारी के आलम में पड़ोसियों से खुन्नस क्यों?
- भूमि विवाद न्यायालय में विचाराधीन,फिर कुत्ते के नाम पर विवाद क्यों?
- पालतू कुत्ते के शौच को लेकर कई शिकायतें, कार्रवाई नगण्य
- सोशल मीडिया में वीडियो शेयर कर सहानुभूति लेने की कोशिश पर उठे सवाल
अंबिकापुर। शहर के डी.सी. रोड क्षेत्र में चल रहा एक पड़ोसी विवाद अब केवल कुत्ते के शौच या सोशल मीडिया वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है। वरिष्ठ नागरिक महिला श्रीमती गीता सिंह और उनके परिवार द्वारा प्रशासन को दिए गए आवेदन ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पड़ोस में रहने वाले दिक्षांत सिंह और निशांत सिंह द्वारा लगातार ऐसा वातावरण निर्मित किया जा रहा है जिससे परिवार मानसिक तनाव, भय और असुरक्षा की स्थिति में जीवन व्यतीत करने को मजबूर हो गया है। हलाकि थाना प्रभारी ने आवेदन लेने से मना करते हुए पुराने आवेदन पर आज शाम कार्यवाही का आश्वासन दिया है। आवेदन के अनुसार विवाद की शुरुआत पालतू कुत्ते को लेकर हुई, लेकिन समय के साथ यह मामला निजी प्रताड़ना, सोशल मीडिया पर सार्वजनिक प्रदर्शन और कथित रूप से जानबूझकर उकसावे की घटनाओं तक पहुंच गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पड़ोसी युवकों द्वारा अपने पालतू कुत्ते को बार-बार उनके मकान की खिड़की के समीप शौच कराया जाता है। विरोध करने पर विवाद की स्थिति निर्मित होती है और पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जाता है।
वीडियो ही बन गया सबसे बड़ा सबूत
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो स्वयं यह दर्शाते हैं कि कुत्ते को जिस स्थान पर शौच कराया जा रहा है, वह आवेदक परिवार के मकान की खिड़की और आवासीय हिस्से के बेहद समीप है। वीडियो में विरोध दर्ज कराने के बावजूद उक्त गतिविधि जारी रहने का दावा किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि विवाद समाप्त करना उद्देश्य होता तो बार-बार उसी स्थान पर जाने और वीडियो रिकॉर्डिंग करने की आवश्यकता क्यों पड़ती ?
वरिष्ठ नागरिक को लेकर बढ़ी चिंता
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि शिकायतकर्ता पक्ष में एक वरिष्ठ नागरिक महिला शामिल हैं। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर उन्हें पालतू कुत्ते से डराने, धमकाने और कटवाने का प्रयास किया गया। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल पड़ोसी विवाद नहीं बल्कि वरिष्ठ नागरिक की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है। परिवार का कहना है कि लगातार होने वाली घटनाओं के कारण महिला मानसिक तनाव और भय की स्थिति में हैं। पड़ोस में रहने के बावजूद सौहार्दपूर्ण वातावरण के बजाय तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो रही है।
क्या कुत्ते का विवाद किसी बड़े विवाद का हिस्सा है?
क्षेत्र में चर्चा है कि दोनों पक्षों के बीच भूमि और पारिवारिक संपत्ति से जुड़ा विवाद पहले से न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में कई लोगों का मानना है कि वर्तमान घटनाक्रम केवल कुत्ते या गंदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वर्षों पुरानी रंजिश और संपत्ति विवाद की पृष्ठभूमि भी हो सकती है।
स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब भूमि संबंधी मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब बार-बार ऐसे विवादों को सार्वजनिक रूप से उछालने का उद्देश्य क्या है? क्या यह दबाव बनाने की रणनीति है या फिर सहानुभूति प्राप्त करने का प्रयास?
सोशल मीडिया बना विवाद का नया मैदान
पहले पड़ोसी विवाद घरों की चारदीवारी तक सीमित रहते थे, लेकिन अब सोशल मीडिया ने ऐसे मामलों को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वीडियो को सोशल मीडिया स्टेटस और अन्य प्लेटफॉर्म पर साझा कर उन्हें बदनाम करने तथा जनसहानुभूति हासिल करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी बंटी हुई दिखाई दे रही हैं। कई लोग इसे अनावश्यक विवाद को बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई का इंतजार
आवेदकों के अनुसार इस संबंध में पूर्व में भी पुलिस कोतवाली में लिखित शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। परिवार का आरोप है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण विवाद लगातार बढ़ता गया। अब शिकायतकर्ता परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल की जाए तथा वरिष्ठ नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कई सवालों के जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही मिलेंगे?