सरगुजा में तिलहन किसान मेले का शुभारंभ, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों को दी आधुनिक खेती अपनाने की सलाह

सरगुजा में तिलहन किसान मेले का शुभारंभ, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों को दी आधुनिक खेती अपनाने की सलाह

अम्बिकापुर। विष्णु देव साय ने रविवार को सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों और निजी कंपनियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर किसानों को दी जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत महाविद्यालय परिसर में साल का पौधा रोपित किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, जहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 3100 रुपये में धान खरीदी कर रही है और अंतर की राशि का भुगतान भी एकमुश्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने किसानों से किए गए वादों को पूरा किया है।

मुख्यमंत्री ने तिलहन उत्पादन की आवश्यकता पर जोर देते हुए बताया कि देश वर्तमान में अपनी जरूरत का लगभग 57 प्रतिशत तिलहन ही उत्पादन कर पा रहा है, जबकि 43 प्रतिशत आयात करना पड़ता है। इस कमी को दूर करने के लिए तिलहन विकास परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिकों की सलाह अपनाकर तिलहन उत्पादन बढ़ाने की अपील की। साथ ही तिलहन फसलों के लिए प्रति एकड़ 11 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की जानकारी भी दी।

उन्होंने किसानों को पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसाय अपनाने की सलाह दी, जिससे आय में वृद्धि हो सके। साथ ही जीएसटी सुधारों के बाद कृषि यंत्रों की कीमतों में आई कमी को किसानों के लिए लाभकारी बताया।

इस अवसर पर राम विचार नेताम ने कहा कि नरेंद्र मोदी के आह्वान के अनुरूप देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है और इसके लिए दलहन एवं तिलहन उत्पादन बढ़ाना होगा।

कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ राज्य में संचालित कृषि महाविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से हर वर्ष लगभग 50 हजार किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक प्रबोध मिंज, रामकुमार टोप्पो सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

स्टॉलों का निरीक्षण और सामग्री वितरण
कार्यक्रम में कुल 40 स्टॉल लगाए गए, जिनमें 5 स्टॉल कृषि महाविद्यालय, 8 विभिन्न विभागों और 27 निजी कंपनियों के थे। मुख्यमंत्री ने इन स्टॉलों का निरीक्षण किया और विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को सामग्री वितरित की।

मत्स्य पालन विभाग के अंतर्गत हितग्राही जगजीवन राम, कलिंदर राम और कृपाशंकर सिंह को जाल एवं आइस बॉक्स वितरित किए गए। वहीं सुखराम कुजूर और उमेश्वर लाल राजवाड़े को ट्रैक्टर के लिए अनुदान राशि के चेक प्रदान किए गए।

स्टॉलों के माध्यम से किसानों को शासकीय योजनाओं, आधुनिक तकनीकों और निजी कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों की विस्तृत जानकारी दी गई।

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