उदयपुर वन परिक्षेत्र में जंगलों की अवैध कटाई और कब्जे का खेल, विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

उदयपुर वन परिक्षेत्र में जंगलों की अवैध कटाई और कब्जे का खेल, विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल


  1. गर्मी शुरू होते ही इलेक्ट्रॉनिक आरी से हरे-भरे वृक्षों की कटाई
  2. एनएच-130 सतखंडा के पास लगभग 5 एकड़ जंगल पर फेंसिंग कर कब्जा
  3. वन विभाग का दावा – कब्जाधारी के पास वन अधिकार पत्र
  4. रसूखदारों को पट्टा, गरीब किसानों को नहीं मिल रहा लाभ
  5. जंगलों में भ्रष्टाचार और मनमानी का आरोप

🌲 जंगलों की अवैध कटाई

सरगुजा जिले के उदयपुर वन परिक्षेत्र में जंगलों की अवैध कटाई और कब्जे का खेल लगातार जारी है।
गर्मी शुरू होते ही इलेक्ट्रॉनिक आरी से हरे-भरे वृक्षों को काटा जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों की कटाई खुलेआम हो रही है और विभाग इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा।



🚧 कब्जे का मामला

एनएच-130 सतखंडा के पास अंबिकापुर-बिलासपुर मार्ग पर उद्यान विभाग की नर्सरी से पहले लगभग 5 एकड़ जंगल को फेंसिंग तार से घेर लिया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह कब्जा अवैध है और जंगल की जमीन पर धीरे-धीरे निजी स्वामित्व का दावा किया जा रहा है।



📑 विभाग का दावा

वन विभाग का कहना है कि कब्जा करने वाले व्यक्ति के पास वन अधिकार पत्र है, इसलिए कार्रवाई नहीं की जा रही।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग मनमाने ढंग से पैसे लेकर रसूखदारों को जंगल का पट्टा दे रहा है, जबकि गरीब किसान बेफायदा रह जाते हैं।



👥 स्थानीय लोगों की नाराजगी

ग्रामीणों ने कहा कि जंगल उनकी आजीविका का आधार है।
लकड़ी, चारा और अन्य संसाधनों के लिए वे जंगल पर निर्भर हैं।
यदि अवैध कब्जे और कटाई जारी रही तो आने वाले समय में पर्यावरण और ग्रामीण जीवन दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा।


⚠️ भ्रष्टाचार के आरोप

स्थानीय लोगों ने वन विभाग पर भ्रष्टाचार और मनमानी का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि विभाग केवल रसूखदारों को फायदा पहुंचा रहा है और गरीब किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है।


📍 उदयपुर वन परिक्षेत्र में जंगलों की अवैध कटाई और कब्जे का यह मामला प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि इस पर कब और कैसी कार्रवाई होती है।

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