नैनो यूरिया से खेती में लाभ: ग्राम कतकालो के किसान परशुराम राजवाड़े बने उदाहरण

नैनो यूरिया से खेती में लाभ: ग्राम कतकालो के किसान परशुराम राजवाड़े बने उदाहरण

  • किसान परशुराम राजवाड़े ने पारंपरिक बोरी वाले खाद की जगह नैनो यूरिया का प्रयोग किया
  • उपयोग में आसान, लागत और समय की बचत
  • धान और सब्जियों की खेती में मिले शानदार परिणाम
  • अन्य किसानों से भी नैनो यूरिया अपनाने की अपील

📰 विस्तृत समाचार

अंबिकापुर,  – कृषि क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान खेती को लाभकारी बना रहे हैं।
ग्राम कतकालो के प्रगतिशील किसान परशुराम राजवाड़े ने पारंपरिक बोरी वाले खाद की जगह नैनो यूरिया (तरल) का सफल प्रयोग कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।



🌾 पारंपरिक खाद की तुलना में सुविधाजनक

राजवाड़े ने बताया कि वे वर्ष 2024 से नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं।
पहले 45 किलो की यूरिया बोरी खरीदने में अधिक लागत आती थी और परिवहन में भारी असुविधा होती थी।
पीक सीजन में बोरी वाले यूरिया की कमी भी रहती थी।
इसके विपरीत, नैनो यूरिया की छोटी शीशी सस्ती, आसानी से उपलब्ध और ले जाने में सुविधाजनक है।


🚜 खेती में शानदार परिणाम

उन्होंने सबसे पहले धान की फसल में नैनो यूरिया का प्रयोग किया, जहां परिणाम उत्साहजनक रहे।
इसके बाद उन्होंने सब्जियों की खेती में भी इसका उपयोग किया।
वर्तमान में वे अपनी लगभग ढाई से तीन एकड़ भूमि पर नैनो यूरिया का सफलतापूर्वक छिड़काव कर रहे हैं।


🙏 किसानों से अपील

परशुराम राजवाड़े ने कहा –
“नैनो यूरिया उपयोग में आसान है, यह खेती की लागत कम करता है और उत्पादन बढ़ाता है। जिले के किसानों को भी इसे अपनाना चाहिए ताकि खेती लाभकारी बने।”


📍 यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि आधुनिक कृषि तकनीकें किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

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