नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में नशीली दवाओं की तस्करी पर लगाम कसने के लिए Railway Protection Force (आरपीएफ) द्वारा लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए आरपीएफ विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर अभियान चला रही है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रेलवे से जुड़े एनडीपीएस मामलों का राज्यवार विवरण National Crime Records Bureau (एनसीआरबी) की रिपोर्ट क्राइम इन इंडिया में प्रकाशित किया जाता है। हालांकि, यह डेटा वस्तुवार (जैसे गांजा, मॉर्फिन आदि) या रेलवे-विशेष आधार पर अलग से उपलब्ध नहीं होता। इसके अलावा Directorate of Revenue Intelligence (डीआरआई), Narcotics Control Bureau (एनसीबी), National Investigation Agency (एनआईए) और Central Bureau of Investigation (सीबीआई) द्वारा की गई जब्ती का डेटा भी इसी रिपोर्ट में सम्मिलित होता है।
आरपीएफ को वर्ष 2019 में अधिसूचना के माध्यम से NDPS Act 1985 की धारा 42 और 67 के तहत तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी के अधिकार दिए गए हैं। हालांकि, आरपीएफ को मामलों का पंजीकरण और जांच करने का अधिकार नहीं है, इसलिए बरामदगी और गिरफ्तार आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए जीआरपी या अन्य सक्षम एजेंसियों को सौंप दिया जाता है।
नशीली दवाओं की तस्करी रोकने के लिए आरपीएफ द्वारा कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें एनसीबी, जीआरपी और स्थानीय पुलिस के साथ नियमित समन्वय बैठकें, नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनकोर्ड) के माध्यम से संयुक्त कार्रवाई, प्रमुख स्टेशनों पर एक्स-रे बैगेज स्कैनर की स्थापना और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी शामिल है। इसके साथ ही संवेदनशील मार्गों और ट्रेनों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं तथा जांच के लिए प्रशिक्षित स्निफर डॉग का उपयोग किया जा रहा है।
यात्रियों को जागरूक करने के लिए भी आरपीएफ समय-समय पर अभियान चलाती है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना समय पर मिल सके।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023, 2024 और 2025 में आरपीएफ ने क्रमशः 1,220, 1,392 और 1,716 एनडीपीएस मामलों का पता लगाया है, जिन्हें आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित एजेंसियों को सौंपा गया। लगातार बढ़ती कार्रवाई यह दर्शाती है कि रेलवे में नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ अभियान तेज हो रहा है
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