सेवानिवृत्त मानचित्रकार की कार्यालय में मौजूदगी पर उठे सवाल

सेवानिवृत्त मानचित्रकार की कार्यालय में मौजूदगी पर उठे सवाल

  • कोरिया वन मंडल में करीब एक माह पहले सेवानिवृत्त हुए मानचित्रकार सी.पी. पटेल की कार्यालय में लगातार मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
  • आरोप है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी वे शनिवार और रविवार जैसे शासकीय अवकाश के दिनों में कार्यालय पहुंचकर शासकीय फाइलों का अवलोकन करते नजर आ रहे हैं।
  • सेवानिवृत्ति के बाद बिना किसी आधिकारिक नियुक्ति या आदेश के कार्यालय में फाइलें देखने की अनुमति है या नहीं, यह सवाल उठा है।
  • कोरिया वन मंडल में संचालित विभिन्न प्लांटेशन एवं अन्य शासकीय कार्यों को लेकर पारदर्शिता की मांग उठ रही है।
  • वन विभाग के सक्षम अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

बैकुंठपुर, कोरिया में कोरिया वन मंडल में करीब एक माह पहले सेवानिवृत्त हो चुके मानचित्रकार सी.पी. पटेल की कार्यालय में लगातार मौजूदगी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी वे शनिवार और रविवार जैसे शासकीय अवकाश के दिनों में कार्यालय पहुंचकर शासकीय फाइलों का अवलोकन करते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि सी.पी. पटेल मानचित्रकार के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके बावजूद अवकाश के दिनों में भी उनके कार्यालय पहुंचने को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा है।

जब उनसे कार्यालय में मौजूदगी तथा अवकाश के दिन शासकीय कार्य किए जाने के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो वे इस संबंध में स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सेवानिवृत्ति के बाद बिना किसी आधिकारिक नियुक्ति अथवा आदेश के किसी कर्मचारी को शासकीय कार्यालय में बैठकर फाइलें देखने की अनुमति है या नहीं। यदि अनुमति है तो उसका आधार क्या है और यदि अनुमति नहीं है, तो कार्यालय में उनकी मौजूदगी कैसे हो रही है।

वहीं, स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद भी सी.पी. पटेल कार्यालय में अपनी सेवाएं किस उद्देश्य से दे रहे हैं। कोरिया वन मंडल में संचालित विभिन्न प्लांटेशन एवं अन्य शासकीय कार्यों को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठ रही है। हालांकि, सी.पी. पटेल की कार्यालय में मौजूदगी के पीछे वास्तविक कारण और उन्हें किसी अधिकारी की ओर से कोई अनुमति प्राप्त है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। वन विभाग के सक्षम अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। 

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