लखनपुर, 12 जून 2026। आकांक्षी विकासखंड लखनपुर में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) की पहचान, सत्यापन एवं अद्यतन डेटा संग्रह के लिए आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया। यह प्रशिक्षण जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में 10 जून से 12 जून 2026 तक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, लखनपुर में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन समावेशी शिक्षा के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के व्यापक सर्वेक्षण कार्य के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के उद्देश्य से किया गया। इसमें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की मितानिनों, महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा शिक्षा विभाग के शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, सत्यापन, अद्यतन डेटा संकलन तथा उन्हें आवश्यक सुविधाओं एवं शासकीय योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही सर्वेक्षण प्रपत्रों को सही एवं स्पष्ट रूप से भरने के संबंध में सर्वे दल प्रभारियों को आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।
कार्यशाला में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act), 2016 के अंतर्गत शामिल 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को दिव्यांगताओं के लक्षण, पहचान, रोकथाम एवं चिन्हांकन की प्रक्रिया समझाई गई तथा चिन्हांकित बच्चों की ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
प्रशिक्षण में विकासखंड की 74 ग्राम पंचायतों से कुल 275 प्रतिभागियों ने भाग लिया। बच्चों के चिन्हांकन के बाद उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने तथा आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षा विभाग के CWSN सूचकांकों को बेहतर बनाने पर विशेष चर्चा की गई।
कार्यक्रम में विकासखंड शिक्षा अधिकारी डी.के. गुप्ता, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी आलोक सिंह, बीआरसी दीपेश पांडे एवं बीपीओ अरविंद गुप्ता के निर्देशन में बीआरपी समावेशी शिक्षा भागवत देवांगन एवं वैदेही द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। जनपद पंचायत की एबीपी फेलो शुभिता शुक्ला ने भी सर्वेक्षण कार्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन में सीएसी हेमसागर प्रधान, भागीरथी कुमार, अजय, जीवन दास, दुष्यंत कश्यप, अंजनी कुमार सिंह सहित अन्य शिक्षकगण, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं मितानिनों का सराहनीय योगदान रहा। जिला प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि इस सर्वेक्षण के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सुविधाओं एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने में सहायता मिलेगी।