खेत बचाओ अभियान: नील हरित शैवाल से मिट्टी की सेहत संवार रहे लब्जी नावापारा के किसान धनेश्वर प्रसाद

खेत बचाओ अभियान: नील हरित शैवाल से मिट्टी की सेहत संवार रहे लब्जी नावापारा के किसान धनेश्वर प्रसाद

  • 6 एकड़ भूमि पर जैविक खेती की ओर बढ़े किसान धनेश्वर प्रसाद
  • रासायनिक खाद छोड़कर नील हरित शैवाल (Blue-Green Algae) का प्रयोग
  • मिट्टी की सेहत सुधारने और नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए टैंक बनाकर उत्पादन
  • बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का संकल्प
  • अन्य किसानों से भी जैविक खेती अपनाने की अपील

📰 विस्तृत समाचार

अंबिकापुर,  – खेती में रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता लगातार घट रही है।
इसी बीच ग्राम पंचायत लब्जी, नावापारा के प्रगतिशील किसान धनेश्वर प्रसाद ने एक नई राह चुनी है।
उन्होंने रासायनिक खादों का मोह छोड़कर पूरी तरह से जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाया है और क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।



🌱 कृषि विभाग का मार्गदर्शन

धनेश्वर बताते हैं कि पहले वे केवल रासायनिक खादों का प्रयोग करते थे।
हर साल खाद की मात्रा बढ़ानी पड़ती थी और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम होती जा रही थी।
समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कृषि विस्तार विभाग से संपर्क किया और मिट्टी का परीक्षण कराया।
रिपोर्ट में नाइट्रोजन की कमी पाई गई।
विभागीय अधिकारियों ने उन्हें नील हरित शैवाल (Blue-Green Algae) से खेती करने की सलाह दी।


🛠️ टैंक बनाकर उत्पादन

मार्गदर्शन पर अमल करते हुए धनेश्वर ने अपने घर के पास एक टैंक बनाया और नील हरित शैवाल का उत्पादन शुरू किया।
उन्होंने बताया कि इस टैंक से लगभग 25 किलो नील हरित शैवाल का उत्पादन होगा।
इसे खेतों में डालने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की पूर्ति होगी और जमीन की सेहत सुधरेगी।


🌍 जैविक खेती का महत्व

धनेश्वर प्रसाद का मानना है कि जैविक खेती केवल वर्तमान फसल को बचाने के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए भी जरूरी है।
जैविक खेती से –

  • मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है
  • पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं
  • फसल की गुणवत्ता और मात्रा में वृद्धि होती है
  • रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से फैलने वाली बीमारियों में कमी आती है
  • शुद्ध और पौष्टिक आहार मिलता है

उन्होंने कहा कि यह खेती पर्यावरण को भी सुरक्षित रखती है और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करती है।


🚜 खेत बचाओ अभियान

धनेश्वर ने इसे खेत बचाओ अभियान का नाम दिया है।
उनका कहना है कि यदि किसान समय रहते जैविक खेती की ओर नहीं बढ़े तो मिट्टी की सेहत और फसल उत्पादन दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि नील हरित शैवाल जैसे जैविक विकल्प खेती को टिकाऊ और लाभकारी बना सकते हैं।


🙏 अन्य किसानों से अपील

धनेश्वर प्रसाद ने क्षेत्र के अन्य किसानों से अपील की –
“रासायनिक खादों का त्याग कर जैविक खेती अपनाएं। इससे न केवल आपकी मिट्टी और फसल सुरक्षित होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी भी स्वस्थ जीवन जी सकेगी।”


🌟 निष्कर्ष

धनेश्वर प्रसाद का प्रयास यह साबित करता है कि नवाचार और जागरूकता से खेती को बचाया जा सकता है।
नील हरित शैवाल का प्रयोग मिट्टी की सेहत सुधारने और उत्पादन बढ़ाने का एक सशक्त उपाय है।
उनकी यह पहल न केवल ग्राम नावापारा बल्कि पूरे सरगुजा क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणादायी है।


📍 यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि जब किसान रासायनिक खादों से हटकर जैविक खेती की ओर बढ़ते हैं, तो वे न केवल अपनी जमीन बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित करते हैं।

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