- पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने पेशा कानून के क्रियान्वयन पर मौजूदा सरकार को घेरा
- कहा – कांग्रेस सरकार ने आदिवासी जनपदों में ग्रामसभा अध्यक्ष पद पर महिला-पुरुष को चक्रीय क्रम में अवसर देने का प्रावधान किया था
- जल, जंगल, जमीन और वन उत्पादों पर आदिवासियों का हक सुनिश्चित करने की बात दोहराई
- ढाई साल बाद कांग्रेस की सरकार लाने का आह्वान
- कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित कई वरिष्ठ नेता रहे उपस्थित
📰 विस्तृत समाचार
कोरबा, – विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति द्वारा बुका में आयोजित महासम्मेलन में पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी तब पेशा कानून को प्रमुखता से लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए थे।
सिंहदेव ने बताया कि इस कानून में यह प्रावधान किया गया था कि प्रदेश के 85 आदिवासी जनपदों की प्रत्येक पंचायतों में ग्रामसभा अध्यक्ष पद पर महिला और पुरुष को चक्रीय क्रम में अवसर दिया जाए। साथ ही गांव के तालाबों पर पहला हक गांव के लोगों का रखा गया और मछुवारों के हित में पहल की गई।
⚡ जल-जंगल-जमीन पर हक
सिंहदेव ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और वन उत्पाद आदिवासियों की आजीविका का साधन हैं।
यदि इनका अधिग्रहण अन्य उपयोग के लिए किया जाता है तो प्रभावित लोगों को कई वर्षों तक मुआवजा मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बांध और मत्स्य पालन पर स्थानीय निवासियों का हक है और यह कानून में स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है।
🗣️ राजनीतिक संदेश
सिंहदेव ने कहा कि मौजूदा सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।
उन्होंने आह्वान किया कि “ढाई साल बाद जोर लगाकर कांग्रेस की सरकार लाइये और फिर हक के साथ अपनी मांगों को पूरा कराइये।”
उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे भी आदिवासी वर्ग और स्थानीय निवासियों के हक की लड़ाई कांग्रेस जारी रखेगी।
👥 उपस्थित नेता
महासम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, पूर्व मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह, विधायक एवं आदिवासी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जनक राम ध्रुव, सामाजिक कार्यकर्ता आलोक शुक्ला, पूर्व विधायक पुरुषोत्तम काँवर, मोहित केरकेट्टा, पीसीसी महासचिव हरीश परसाई, एआईसीसी सदस्य आदित्येश्वर सिंहदेव, सूरज महंत सहित जिले के कार्यकर्ता और साथी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
📍 महासम्मेलन में आदिवासी हक, पेशा कानून और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस नेताओं ने एकजुटता दिखाई और संघर्ष समिति को समर्थन देने का भरोसा दिलाया।