सरगुजा सहकारी बैंक घोटाले की जांच अब ईडी करेगी, 28 करोड़ की हेराफेरी और किसानों के नाम पर फर्जीवाड़ा उजागर

सरगुजा सहकारी बैंक घोटाले की जांच अब ईडी करेगी, 28 करोड़ की हेराफेरी और किसानों के नाम पर फर्जीवाड़ा उजागर


  • सरगुजा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक में करोड़ों का घोटाला
  • ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू की
  • 28 करोड़ रुपये की हेराफेरी और फर्जी खाते खोलने का आरोप
  • केरजू सहकारी समिति में 127 किसानों के नाम पर ₹1.93 करोड़ का फर्जी लोन
  • बैंक मैनेजर अशोक सोनी सहित 12 लोग गिरफ्तार, 4 अधिकारी बर्खास्त

⚠️ घोटाले का खुलासा

अंबिकापुर/रायपुर, – सरगुजा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक की विभिन्न शाखाओं में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) करेगी।
यह घोटाला मई 2025 में ऑडिट के दौरान सामने आया था। इसके बाद 31 मई 2025 को बैंक मैनेजर सहित 4 बड़े अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया था।


📑 जांच की प्रक्रिया

शनिवार को बैंक के सीईओ ने पुष्टि की कि घोटाले से संबंधित सभी दस्तावेज ईडी को सौंप दिए गए हैं और मनी लॉन्ड्रिंग की आधिकारिक जांच शुरू हो चुकी है।
तत्कालीन कलेक्टर विलास भोस्कर ने जून 2025 में राज्य शासन को पत्र लिखकर ईडी और सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।राज्य शासन के अनुरोध पर ईडी ने जांच की मंजूरी दी और रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने पूरी फाइलें मंगा ली हैं।



👥 घोटाले का स्वरूप

जांच रिपोर्ट के अनुसार, शंकरगढ़ शाखा के बैंक मैनेजर अशोक कुमार सोनी ने फर्जी खाते खोलकर लगभग ₹28 करोड़ की हेराफेरी की।
इन खातों से नकद निकासी और ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए।
किसानों के केसीसी फंड, मनरेगा खातों और ग्राम पंचायतों की राशि का दुरुपयोग किया गया।


🏛️ नया फर्जीवाड़ा

मुख्य घोटाले के बीच ही सरगुजा के केरजू सहकारी समिति में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है।
यहाँ 127 किसानों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर ₹1.93 करोड़ का लोन निकाला गया।


👮 कार्रवाई

इस मामले में पुलिस ने पहले ही बैंक मैनेजर अशोक सोनी सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया था।
4 अधिकारियों को बर्खास्त किया गया, जबकि 3 कर्मचारी घोटाला उजागर होने से पहले ही रिटायर हो चुके थे।
सीईओ श्रीकांत चंद्राकर ने बताया कि ईडी की टीम अभी तक सरगुजा नहीं आई है, लेकिन जांच से संबंधित सभी रिपोर्ट भेज दी गई हैं।


📍 सरगुजा सहकारी बैंक घोटाले ने न केवल वित्तीय व्यवस्था बल्कि किसानों और ग्रामीण विकास योजनाओं की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईडी की जांच से अब यह स्पष्ट होगा कि गबन की गई राशि किन संपत्तियों में निवेश की गई और इसके पीछे कौन-कौन शामिल हैं।

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