सरगुजा पुलिस अधीक्षक ने जारी की 108 उपनिरीक्षक और आरक्षकों की तबादला सूची, पारदर्शिता पर उठे सवाल

सरगुजा पुलिस अधीक्षक ने जारी की 108 उपनिरीक्षक और आरक्षकों की तबादला सूची, पारदर्शिता पर उठे सवाल

  • आईजी-एसपी से भी ऊपर तक पहुंच रखने वाले रसूखदार पुलिस बल तबादला रुकवाने छोटे गृहमंत्री के संपर्क में : सूत्र
  • सरगुजा पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल: 108 पुलिसकर्मियों के तबादले से महकमे में हलचल,पारदर्शिता और दबाव की चर्चाएं तेज
  • 108 उपनिरीक्षक और आरक्षकों का स्थानांतरण आदेश जारी
  • शहर में पदस्थ कई अधिकारी और कर्मचारी ग्रामीण अंचलों में भेजे गए
  • सूत्रों के अनुसार कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपनी “पहुंच” का इस्तेमाल कर सकते हैं
  • आम जनता को पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीद
  • "कई आरक्षकों का कहना है कि वे ग्रामीण अंचल में नहीं जाएंगे और रक्षित केंद्र, अंबिकापुर शहर में ही रहेंगे। अब देखना यह है कि एसपी सरगुजा क्या करते हैं।"

अंबिकापुर। सरगुजा पुलिस अधीक्षक द्वारा जिले में लंबे समय बाद बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 108 पुलिसकर्मियों की तबादला सूची जारी की गई है। जारी सूची में उपनिरीक्षक (SI), सहायक उपनिरीक्षक (ASI), प्रधान आरक्षक एवं आरक्षकों सहित कई थाना और चौकी स्तर के कर्मचारियों के नाम शामिल हैं। आदेश सामने आते ही पूरे पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है।
पुलिस विभाग के अनुसार यह तबादले प्रशासनिक आवश्यकता, कानून व्यवस्था को मजबूत करने, कार्यप्रणाली में कसावट लाने और लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों को बदलने के उद्देश्य से किए गए हैं। सभी स्थानांतरित कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

गृह जिले में पदस्थ रहने की चाह, तबादला रुकवाने की कवायद शुरू

तबादला सूची जारी होते ही कई पुलिसकर्मियों द्वारा तबादला रुकवाने की कोशिशें शुरू होने की चर्चा विभागीय गलियारों में तेजी से फैल गई है। सूत्रों की मानें तो कुछ कर्मचारी गृह जिले में पदस्थ होने के कारण अपना स्थानांतरण नहीं चाहते। ऐसे कर्मचारियों द्वारा विभिन्न माध्यमों से तबादला निरस्त कराने की कोशिश की जा रही है।
बताया जा रहा है कि कुछ लोग पारिवारिक परेशानी, माता-पिता की बीमारी, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी कारणों को आधार बनाकर अधिकारियों के सामने आवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं। हालांकि विभागीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि वास्तविक आवश्यकता वाले मामलों के साथ-साथ कई कर्मचारी इन कारणों का उपयोग केवल पदस्थापना बचाने के लिए कर रहे हैं।

नशे के कारोबारियों से सांठगांठ की चर्चा

पुलिस महकमे में सबसे ज्यादा चर्चा उन कर्मचारियों को लेकर हो रही है जो लंबे समय से एक ही थाना क्षेत्र में जमे हुए थे। सूत्रों के अनुसार कुछ कर्मचारियों की संबंधित थाना क्षेत्रों में सक्रिय नशे के कारोबारियों और अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों से सांठगांठ होने की बातें भी सामने आ रही हैं।
ऐसे कर्मचारियों के बारे में कहा जा रहा है कि वे किसी भी हालत में अपना थाना क्षेत्र छोड़ना नहीं चाहते और तबादला रुकवाने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। विभाग के भीतर यह भी चर्चा है कि कुछ मामलों में स्थानीय प्रभाव और बाहरी दबाव का इस्तेमाल कर आदेश प्रभावित करने की कोशिशें भी की जा रही हैं।
ऊंची पहुंच का धौंस, अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश

सूत्र बताते हैं कि कुछ पुलिसकर्मी अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच का हवाला देकर वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कई मामलों में यह चर्चा भी सामने आई है कि कुछ कर्मचारी खुद को प्रभावशाली लोगों के करीबी बताकर विभागीय निर्णयों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।
विभागीय कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि कुछ लोग वरिष्ठ अधिकारियों के सामने भी अपना रुतबा दिखाने से पीछे नहीं हट रहे। हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई भी अधिकारी इस विषय पर खुलकर बोलने से बच रहा है।

पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल

तबादला सूची सामने आने के बाद विभागीय पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि कई लोग वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ थे, जबकि कुछ कर्मचारियों को अचानक दूरस्थ क्षेत्रों में भेज दिया गया। इससे सूची को लेकर असंतोष और चर्चाओं का दौर जारी है।
हालांकि पुलिस विभाग की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। विभाग का कहना है कि सभी तबादले प्रशासनिक आवश्यकता और कार्य व्यवस्था को ध्यान में रखकर किए गए हैं।

महकमे में बढ़ी हलचल, नई पदस्थापना को लेकर चर्चाएं

तबादला आदेश के बाद पुलिस लाइन से लेकर थाना स्तर तक चर्चाओं का माहौल बना हुआ है। कई कर्मचारी अपने नए कार्यस्थलों की तैयारी में जुट गए हैं, जबकि कुछ अब भी आदेश में संशोधन या निरस्तीकरण की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
जानकारों का मानना है कि यदि तबादला प्रक्रिया निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो इससे पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और लंबे समय से जमे कर्मचारियों के प्रभाव पर भी अंकुश लग सकेगा।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने