बैंक सखी साहिदा बेगम बनीं आत्मनिर्भर, डेढ़ हजार से बढ़कर 10 हजार रुपये हुई मासिक आय

बैंक सखी साहिदा बेगम बनीं आत्मनिर्भर, डेढ़ हजार से बढ़कर 10 हजार रुपये हुई मासिक आय

अंबिकापुर। शारीरिक चुनौती और आर्थिक कठिनाइयों के बीच सरगुजा जिले के लुंड्रा विकासखंड के ग्राम बतवाही की साहिदा बेगम ने स्वरोजगार से अपनी पहचान बनाई है। कभी दूसरे कॉमन सर्विस सेंटर में महज 1,500 रुपये प्रतिमाह पर काम करने वाली साहिदा आज स्वयं का सीएससी सेंटर संचालित कर लगभग 10 हजार रुपये मासिक आय अर्जित कर रही हैं। बैंक सखी के रूप में काम करते हुए वे ग्रामीणों को बैंकिंग और ऑनलाइन सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं।

साहिदा के एक पैर में शारीरिक समस्या है, जिसके कारण उन्हें चलने के लिए डंडे का सहारा लेना पड़ता है। एकल अभिभावक होने के साथ उन पर अपनी मां की देखभाल की भी जिम्मेदारी है। सीमित वेतन से परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन था। ऐसे में उन्होंने स्वयं का रोजगार शुरू करने का निर्णय लिया।

सीएससी का काम सीखने के बाद साहिदा ने ऋण लेकर लैपटॉप खरीदा और वर्ष 2022 में सीएससी आईडी के लिए आवेदन किया। इसके बाद प्रिंटर और फोटोकॉपी मशीन की व्यवस्था कर अपने काम का विस्तार किया। वर्तमान में वे किराये की दुकान में केंद्र संचालित कर रही हैं, जहां दो लैपटॉप सहित अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं।

बैंकिंग के साथ ऑनलाइन सेवाएं भी

साहिदा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट के रूप में प्रतिमाह लगभग 150 बैंकिंग लेन-देन करती हैं। इसके अलावा अटल डिजिटल सुविधा केंद्र की संचालक के रूप में मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल भुगतान, पैन कार्ड, एग्रीस्टैक और अन्य ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इससे ग्रामीणों को गांव में ही आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं।

उन्होंने महतारी वंदन योजना के अंतर्गत लगभग 1,600 हितग्राहियों का ई-केवाईसी भी किया है। बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं का दायरा बढ़ने से उनकी आमदनी में सुधार हुआ है और परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है।

साहिदा ने अपनी शारीरिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद काम सीखने तथा व्यवसाय को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखा। आज उनका केंद्र परिवार की आजीविका का सहारा बनने के साथ ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने का माध्यम भी बन गया है। 

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