बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुपालन में कथित देरी को गंभीरता से लेते हुए सरगुजा कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री अजीत वसंत (IAS) को अवमानना नोटिस जारी किया है। मामला 78 वर्षीय विधवा श्रीमती बी. एक्का के दिवंगत पति के लंबित सेवा एवं पेंशन संबंधी लाभों से जुड़ा है।
14 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की अदालत ने अवमानना प्रकरण की सुनवाई करते हुए प्रतिवादी क्रमांक-2 श्री अजीत वसंत, कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, सरगुजा को कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने मामले को पांच सप्ताह बाद पुनः सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
6 जनवरी के आदेश में 60 दिन में निर्णय का निर्देश
मामले की मूल याचिका पर 6 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता के दिवंगत पति के सेवा लाभों से जुड़े दावे पर कानून और लागू नीतियों के अनुसार विचार कर निर्णय लिया जाए।
इसमें Revised Pay Scale, Time Pay Scale, Kramonnati, बकाया राशि और पेंशन के पुनर्निर्धारण सहित परिणामी लाभ शामिल थे। न्यायालय ने प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर मामले पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। साथ ही, याचिकाकर्ता की वृद्धावस्था को देखते हुए मामले का शीघ्र निपटारा करने पर भी जोर दिया गया था।
आदेश के बाद भी जारी रहा विभागीय पत्राचार
हाईकोर्ट के आदेश के बाद श्रीमती बी. एक्का ने संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर न्यायालयीन आदेश का पालन करते हुए लंबित सेवा एवं पेंशन लाभ प्रदान करने की मांग की।
इसके बाद 11 मई 2026 को आयुक्त, सरगुजा संभाग, अंबिकापुर ने कलेक्टर को पत्र भेजकर हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में आवश्यक कार्रवाई करने और परिणामी लाभ प्रदान करने की दिशा में कदम उठाने को कहा।
वहीं, 21 मई 2026 को अपर कलेक्टर की ओर से याचिकाकर्ता से पेंशन संबंधी प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेज मांगे गए। याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्होंने चार पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और मृत्यु प्रमाणपत्र की छायाप्रति सहित मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध करा दिए।
इसके बावजूद याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्हें अब तक पेंशन का पूर्ण पुनर्निर्धारण, बकाया राशि और अन्य परिणामी सेवा लाभ प्राप्त नहीं हुए हैं।
निर्धारित समय में अनुपालन नहीं होने पर पहुंचा मामला हाईकोर्ट
न्यायालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा में आदेश का पूर्ण अनुपालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए 78 वर्षीय श्रीमती बी. एक्का की ओर से अधिवक्ता नेल्सन पन्ना एवं अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा के माध्यम से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका प्रस्तुत की गई।
याचिका में कहा गया कि अधिकारियों को न्यायालय के आदेश की जानकारी थी और आदेश के बाद विभागीय स्तर पर पत्राचार तथा आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया भी हुई, लेकिन निर्धारित अवधि में याचिकाकर्ता के दावे पर अंतिम निर्णय लेकर न्यायालय के आदेश का पूर्ण अनुपालन नहीं किया गया।

हाईकोर्ट ने पूछा—अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए?
14 अगस्त 2026 के आदेश में हाईकोर्ट ने सरगुजा कलेक्टर श्री अजीत वसंत (IAS) को नोटिस जारी कर यह बताने को कहा है कि उनके विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
मामले की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद होगी। अब कलेक्टर की ओर से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाने वाला जवाब महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामला अब केवल लंबित पेंशन और सेवा लाभों का नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेश के निर्धारित समय-सीमा में अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है। आगामी सुनवाई में हाईकोर्ट यह देखेगा कि मूल आदेश के बाद अब तक क्या कार्रवाई हुई और याचिकाकर्ता को उसके सेवा एवं पेंशन संबंधी लाभ मिलने में देरी की स्थिति क्या रही।


