अम्बिकापुर, कार्यालय उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, जिला सरगुजा ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित "बिना जांच रिपोर्ट एफआईआर, कर्मचारी 100 दिन जेल में बिताने को हुआ मजबूर" शीर्षक खबर को तथ्यहीन, निराधार और उपलब्ध अभिलेखों के विपरीत बताते हुए विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग का कहना है कि संबंधित मामले में की गई सभी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई नियमानुसार जांच प्रतिवेदन और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की गई है।
विभाग के अनुसार, लगभग 1 करोड़ 7 लाख रुपये के कथित गबन की जांच उपसंचालक स्तर पर गठित जांच समिति द्वारा की गई थी। जांच के दौरान भारतीय स्टेट बैंक में संचालित विभागीय खाते के बैंक स्टेटमेंट, सीजीटीसी से प्राप्त रसीदों एवं अन्य अभिलेखों का मिलान किया गया। जांच में संबंधित राशि बैंक खाते में जमा नहीं होना प्रमाणित पाए जाने पर 25 सितंबर 2025 को जांच प्रतिवेदन पुलिस थाना कोतवाली, अम्बिकापुर को सौंपा गया। इसके बाद 10 जनवरी 2026 को अतिरिक्त जांच प्रतिवेदन भी पुलिस को उपलब्ध कराया गया, जो न्यायालय में प्रस्तुत चालान का हिस्सा है।
विभाग ने स्पष्ट किया कि बिना जांच रिपोर्ट के एफआईआर दर्ज किए जाने संबंधी समाचार पूरी तरह निराधार है। दोनों जांच प्रतिवेदन पुलिस को उपलब्ध कराए जा चुके हैं तथा न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों में शामिल हैं।
कारण बताओ नोटिस के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
विभागीय जानकारी के अनुसार, जांच प्रतिवेदन के आधार पर तत्कालीन सहायक ग्रेड-2 श्री प्रदीप कुमार अंबष्ट को 12 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उनसे बैंक खाते में जमा नहीं हुई राशि के संबंध में स्पष्टीकरण एवं आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन उनके द्वारा कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद नियमानुसार प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई गई।
पुनः जांच में सामने आई 2.98 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितता
विभाग ने बताया कि संबंधित कर्मचारी से प्रभार लिए जाने के बाद पुनः विस्तृत जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि सीजीटीसी से प्राप्त 1 करोड़ 89 लाख 4 हजार 831 रुपये की राशि भी बैंक खाते में जमा नहीं की गई थी।
इसके अलावा पशु रोगी कल्याण समिति की 63 लाख 29 हजार 640 रुपये तथा 37 लाख 27 हजार 853 रुपये सहित कुल 2 करोड़ 98 लाख 14 हजार 544 रुपये के संबंध में भी संबंधित कर्मचारी कोई संतोषजनक लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं कर सके। विभाग का कहना है कि इन सभी तथ्यों एवं दस्तावेजों को पुलिस जांच के दौरान उपलब्ध कराया गया है और वे न्यायालय में प्रस्तुत चालान का हिस्सा हैं।
विभाग ने समाचार को बताया भ्रामक
उपसंचालक कार्यालय ने स्पष्ट किया कि समाचार में प्रकाशित "दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए", "चालान पेश होने पर जांच की पोल खुली" तथा "जांच समिति का गठन नहीं हुआ" जैसे दावे पूरी तरह निराधार हैं। विभाग के अनुसार, जांच समिति का विधिवत गठन किया गया था तथा जांच से संबंधित सभी दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। विभाग का आरोप है कि समाचार में इन तथ्यों का उल्लेख नहीं किए जाने से आमजन के बीच भ्रामक स्थिति उत्पन्न हुई।
न्यायालय में विचाराधीन है मामला
कार्यालय उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, सरगुजा ने बताया कि संबंधित प्रकरण वर्तमान में माननीय जिला एवं सत्र न्यायालय, सरगुजा में विचाराधीन है। न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर मामले का ट्रायल जारी है।