पुलिस की खानापूर्ति से जनता त्रस्त, शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने के आरोप

पुलिस की खानापूर्ति से जनता त्रस्त, शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने के आरोप

 


अंबिकापुर। थानों में शिकायत लेकर पहुंचने वाले आम नागरिकों को न्याय दिलाने के बजाय केवल औपचारिकता पूरी किए जाने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि पुलिस कई मामलों में शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय केवल "फेना काटकर" अथवा प्रारंभिक औपचारिकता पूरी कर अपना पल्ला झाड़ लेती है, जिससे पीड़ितों को न्याय के लिए न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जमीनी विवाद जैसे कुछ मामलों में पक्षकारों को न्यायालय जाने की सलाह समझ में आती है, लेकिन जब मामला मारपीट, धोखाधड़ी, लेनदेन संबंधी विवाद, धमकी, उगाही अथवा अन्य संज्ञेय अपराधों से जुड़ा हो, तब भी यदि पुलिस प्रभावी कार्रवाई नहीं करती और केवल औपचारिकता निभाकर शिकायत बंद कर देती है, तो इससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

नागरिकों का आरोप है कि कई मामलों में शिकायत दर्ज करने या उचित कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें इधर-उधर भटकाया जाता है। इससे न केवल समय और धन की बर्बादी होती है, बल्कि पीड़ितों का कानून व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर पड़ता है।

लोगों का कहना है कि पुलिस की इस कार्यप्रणाली के कारण छोटी-छोटी समस्याएं भी लंबी कानूनी लड़ाई में बदल जाती हैं। उनका मानना है कि यदि शिकायतों पर समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई हो, तो अनेक विवाद शुरुआती स्तर पर ही सुलझाए जा सकते हैं।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि थानों में प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो, संज्ञेय मामलों में कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाए तथा शिकायतकर्ताओं को केवल औपचारिकता पूरी कर लौटाने की बजाय उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था आवश्यक है।

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