हसदेव अरण्य और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सियासी तापमान बढ़ा।

हसदेव अरण्य और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सियासी तापमान बढ़ा।

  • रामगढ़ में कांग्रेस की बड़ी परिचर्चा, हसदेव और प्राकृतिक संपदा संरक्षण पर मंथन
  • रामगढ़ पहाड़ी के नीचे शेड में आयोजित एक दिवसीय परिचर्चा में जुटे हजारों की संख्या में ग्रामीण,
  • कार्यक्रम में शामिल हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री T. S. Singh deo, पीसीसी चीफ दीपक बैज कांग्रेस जिला अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक सहित कई नेता।
  • हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का मुद्दों पर हुई चर्चा
  • वक्ताओं ने रामगढ़ की पुरातात्विक पहाड़ी और पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई।
  • परिचर्चा के दौरान भाजपा और अदानी समूह की नीतियों पर जमकर निशाना साधा गया।
  • प्राकृतिक संपदा संरक्षण और अनियंत्रित दोहन रोकने की मांग को लेकर उठी जोरदार आवाज 

रामगढ़, – छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण को लेकर आज रामगढ़ के शेड में एकदिवसीय परिचर्चा आयोजित की गई।

इस परिचर्चा में कांग्रेस पीसीसी चीफ दीपक बैज, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, वरिष्ठ नेता बालकृष्ण पाठक सहित हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के महिला-पुरुष, बुजुर्ग, बच्चे और क्षेत्र के ग्रामीण शामिल हुए।

सभा में वक्ताओं ने हसदेव अरण्य जंगल में लगातार हो रही लाखों पेड़ों की कटाई पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस विनाशकारी गतिविधि से न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि रामगढ़ पहाड़ी, जो पुरातात्विक धरोहर स्थल है, भी प्रभावित हो रही है।

कांग्रेस नेताओं ने भाजपा और अदानी समूह पर आरोप लगाते हुए कहा कि जंगलों की अनियंत्रित कटाई और खनन गतिविधियों से आदिवासी समुदाय का जीवन, संस्कृति और पर्यावरण खतरे में है।
वक्ताओं ने कहा कि यह केवल प्राकृतिक संपदा की लूट नहीं है बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान और विरासत पर सीधा हमला है।


🌱 जनसमुदाय की आवाज

सभा में उपस्थित ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जंगल और पहाड़ उनके जीवन का आधार हैं।
पेड़ों की कटाई से जलस्रोत सूख रहे हैं, वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में है और आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट गहराता जा रहा है।


📖 ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

रामगढ़ पहाड़ी को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है। यहाँ प्राचीन शिलालेख और गुफाएँ मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जंगलों की कटाई जारी रही तो यह धरोहर भी नष्ट हो जाएगी।


🌍 पर्यावरणीय प्रभाव

  • पेड़ों की कटाई से कार्बन उत्सर्जन बढ़ेगा और जलवायु परिवर्तन की गति तेज होगी।
  • स्थानीय जलवायु असंतुलित होगी, जिससे कृषि प्रभावित होगी।
  • मिट्टी का कटाव और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ सकती हैं।

🗣️ नेताओं के वक्तव्य

दीपक बैज ने कहा – “हसदेव अरण्य केवल जंगल नहीं है, यह छत्तीसगढ़ की आत्मा है। इसे बचाना हमारी जिम्मेदारी है।”
टी.एस. सिंहदेव ने कहा – “रामगढ़ पहाड़ी की रक्षा करना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। भाजपा और अदानी की नीतियाँ विनाशकारी हैं।”
बालकृष्ण पाठक ने कहा – “जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। हम जंगल बचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।”


संकल्प और आगे की राह

परिचर्चा में यह संकल्प लिया गया कि हसदेव अरण्य और रामगढ़ पहाड़ी की रक्षा के लिए जन आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे आदिवासी समुदाय और स्थानीय जनता के साथ मिलकर इस संघर्ष को आगे बढ़ाएंगे और प्राकृतिक संपदा की लूट को रोकने के लिए हर स्तर पर आवाज उठाएंगे।


📍 रामगढ़ की इस परिचर्चा ने छत्तीसगढ़ की जनता की चिंता और संकल्प को एकजुट कर दिया है। हसदेव अरण्य और रामगढ़ पहाड़ी की रक्षा अब जन आंदोलन का स्वरूप लेती जा रही है।

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