- सरगुजा वनमंडल के काष्ठागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित
- मुख्य अतिथि सांसद चिंतामणि महाराज ने “जल है तो कल है” का संदेश दिया
- लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने पर्यावरण संरक्षण को समाज का सामूहिक दायित्व बताया
- टेंगुपुर बांध को रामसर वेटलैंड साइट के रूप में विकसित करने के प्रयासों पर चर्चा
- जैव विविधता प्रबंधन समिति, पीबीआर और ABS प्रावधानों पर विस्तार से विचार-विमर्श
📰 विस्तृत समाचार
अंबिकापुर, – सरगुजा वनमंडल के काष्ठागार में गुरुवार को “जैव विविधता एवं वेटलैंड संरक्षण” विषय पर एक दिवसीय संभाग स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला का उद्देश्य लोगों में जैव विविधता संरक्षण और वेटलैंड के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।मुख्य अतिथि सांसद चिंतामणि महाराज ने “जल है तो कल है” का संदेश देते हुए स्टॉप डैम और चेक डैम के महत्व पर प्रकाश डाला।उन्होंने मैनपाट क्षेत्र के जलाशयों और प्रदूषण मुक्त वेटलैंड संरक्षण पर बल दिया।लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि जंगल और पर्यावरण संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।
🌱 प्रमुख चर्चाएं
- टेंगुपुर बांध को प्रस्तावित रामसर वेटलैंड साइट के रूप में विकसित करने के प्रयास
- जैव विविधता प्रबंधन समिति (BMC), पीबीआर (People’s Biodiversity Register) और स्थानीय जैव संसाधनों के संरक्षण पर चर्चा
- Access and Benefit Sharing (ABS) संबंधी प्रावधानों पर विचार-विमर्श
👥 उपस्थित अतिथि एवं अधिकारी
कार्यशाला में जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवनारायण यादव, मुख्य वन संरक्षक सरगुजा वनवृत्त दिलराज प्रभाकर, वनमंडलाधिकारी सरगुजा अभिषेक जोगावत, आईएफएस प्रोबेशनर श्वेता कम्बोज, नोडल अधिकारी वेटलैंड जेनीग्रेस कुजूर, राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के विषय विशेषज्ञ डॉ. नीतू हरमुख और विधि सलाहकार प्रतीक वर्मा उपस्थित रहे।
इसके अलावा जिला वेटलैंड संरक्षण समिति के सदस्य, उपवनमंडलाधिकारी, वनपरिक्षेत्राधिकारी, एनआरएम इंजीनियर, वानिकी तकनीकी सहायक, वेटलैंड मित्र और जैव विविधता प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य भी शामिल हुए।
📍 नव आस्था जन विकास सेवा समिति के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला ने जैव विविधता और वेटलैंड संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया और समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।