डीसी रोड भूमि विवाद में गणेश सिंह ने खोला पूरा मामला

डीसी रोड भूमि विवाद में गणेश सिंह ने खोला पूरा मामला


  • स्टे आदेश के बावजूद नामांतरण की कोशिश, तथ्यों को छिपाकर भ्रम फैला रहे कुछ लोग
  • नवोदय छत्तीसगढ़ के स्वामी-प्रकाशक बोले – मामला न्यायालय में लंबित, बिना अंतिम निर्णय किसी को दोषी ठहराना अनुचित

अंबिकापुर। शहर के व्यस्ततम डीसी रोड स्थित विवादित भूमि को लेकर चल रहा मामला अब कानूनी, प्रशासनिक और सामाजिक चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। 68 डिसमिल और 96 डिसमिल भूमि से जुड़े इस प्रकरण में हाल ही में प्रकाशित समाचारों के बाद दोनों पक्ष खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर जहां आवेदक पक्ष ने साप्ताहिक समाचार पत्र “नवोदय छत्तीसगढ़” के स्वामी-प्रकाशक गणेश सिंह पर अवैध कब्जे की कोशिश, दबाव बनाने और विवाद उत्पन्न करने जैसे आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर गणेश सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और एक सुनियोजित साजिश बताया है। गणेश सिंह ने विस्तृत बयान जारी करते हुए कहा कि पूरे मामले को जानबूझकर एकतरफा तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने दावा किया कि विवादित भूमि का मामला लंबे समय से राजस्व न्यायालय और सिविल न्यायालय दोनों में विचाराधीन है तथा दोनों जगह से स्थगन आदेश (स्टे) प्रभावी हैं। इसके बावजूद कुछ लोग न्यायालय को गुमराह कर नामांतरण कराने का प्रयास कर रहे हैं।

खसरा नंबर 4777/1 को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे

मामले का केंद्र खसरा क्रमांक 4777/1 एवं उससे जुड़े भूखंड हैं। आवेदक पक्ष का दावा है कि उक्त भूमि स्वर्गीय लक्ष्मी बाई के स्वामित्व एवं आधिपत्य में थी। इस संबंध में माननीय तृतीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 द्वारा व्यवहार वाद क्रमांक 249ए/1990 “बृजभान सिंह विरुद्ध हनुमान सिंह” में 17 मई 1996 को पारित आदेश में लक्ष्मी बाई के तीन उत्तराधिकारी — बृजभान सिंह, स्वर्गीय विक्रम सिंह एवं गीता सिंह — को वैध उत्तराधिकारी माना गया था।आवेदक पक्ष यह भी कह रहा है कि बाद में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने सेकंड अपील क्रमांक SA No.151/2003 में निचली अदालत के आदेश को यथावत रखा था।

लेकिन गणेश सिंह ने इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस भूमि को लेकर समाचार प्रकाशित किए जा रहे हैं, उसकी वर्तमान स्थिति और रिकॉर्ड को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके अनुसार वर्तमान खसरा मेंटेनेंस रिकॉर्ड में खसरा नंबर 4777/1 की भूमि सुरेंद्र कुमार, उमेश कुमार एवं दिनेश कुमार आत्मज रामदेव जायसवाल के नाम दर्ज है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पुराने आदेशों का हवाला देकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड और वर्तमान न्यायालयीन स्थिति का अधिक कानूनी महत्व होता है।

हमारी वसीयत खसरा नंबर 4777/3 से संबंधित

गणेश सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से प्रस्तुत रजिस्टर्ड वसीयत खसरा नंबर 4777/3 की कुल 43 डिसमिल खुली भूमि से संबंधित है, जो वर्तमान में लक्ष्मी देवी के नाम पर दर्ज है। उन्होंने कहा कि इस भूमि को लेकर राजस्व न्यायालय और सिविल न्यायालय दोनों में विवाद लंबित है। राजस्व न्यायालय से 17 सितंबर 2025 से लगातार स्टे आदेश जारी है और आज दिनांक तक प्रभावी है। इसके बावजूद निशांत सिंह उर्फ गोल्डी द्वारा 19 जनवरी 2026 को नजूल न्यायालय में नामांतरण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया। गणेश सिंह ने आरोप लगाया कि यह आवेदन न्यायालय को गुमराह कर षड्यंत्रपूर्वक लगाया गया, जबकि संबंधित पक्ष को पहले से स्टे आदेश की जानकारी थी। उन्होंने कहा कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन हो और स्थगन आदेश लागू हो, तब नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसा है।

पुराने आदेशों से ज्यादा महत्वपूर्ण वर्तमान स्थिति

गणेश सिंह ने कहा कि समाचार प्रकाशित करने वालों को यह समझना चाहिए कि न्यायालयीन मामलों में वर्तमान आदेश और वर्तमान रिकॉर्ड का कानूनी महत्व अधिक होता है। यदि किसी मामले में नया स्टे आदेश प्रभावी है, तो पुराने आदेशों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समाचारों में जानबूझकर केवल एक पक्ष की जानकारी प्रकाशित की गई और वर्तमान न्यायालयीन स्थिति को छिपाया गया। इससे समाज में भ्रम फैल रहा है और लोगों के बीच तनाव की स्थिति बन रही है।

एक आवेदन से पांचों लोगों का नामांतरण संभव

नामांतरण प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर गणेश सिंह ने कहा कि यदि किसी रजिस्टर्ड वसीयत में पांच लोगों के नाम दर्ज हों, तो एक व्यक्ति द्वारा आवेदन प्रस्तुत किए जाने पर भी सभी संबंधित व्यक्तियों के नाम दर्ज किए जा सकते हैं। इसके लिए पांचों लोगों का अलग-अलग आवेदन देना जरूरी नहीं होता।

उन्होंने इस संबंध में नजूल न्यायालय में चले “हनुमान सिंह विरुद्ध बृजभान सिंह” प्रकरण का उदाहरण दिया। उनके अनुसार उस मामले में गणेश सिंह द्वारा अलग आवेदन प्रस्तुत नहीं किए जाने के बावजूद 10 अगस्त 2023 को नजूल न्यायालय ने गोपाल सिंह की वसीयत के आधार पर स्थल जांच रिपोर्ट मंगवाई थी और रिपोर्ट रिकॉर्ड में संलग्न की गई थी।

सिविल कोर्ट में 13 जुलाई 2026 को अगली सुनवाई

गणेश सिंह ने कहा कि संबंधित आवेदन में स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि मामला सिविल कोर्ट में लंबित है और इसकी अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित है।उन्होंने कहा कि जब न्यायालय में मामला विचाराधीन है, तब किसी पक्ष को अंतिम रूप से सही या गलत बताना उचित नहीं है। अंतिम निर्णय केवल सक्षम न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा।

मुझे पत्रकार बताकर निशाना बनाया जा रहा

गणेश सिंह ने कहा कि उन्हें केवल “पत्रकार” बताकर निशाना बनाया जा रहा है, जबकि वे स्वयं को नवोदय छत्तीसगढ़ समाचार पत्र का स्वामी, प्रकाशक एवं मुद्रक बताते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य निष्पक्ष और तथ्यपरक जानकारी देना है, लेकिन कुछ लोग व्यक्तिगत द्वेष के चलते उन्हें बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस स्थान को कुछ लोग निजी भूमि बता रहे हैं,वहाँ वर्षों से नायब तहसीलदार अंबिकापुर-03 के पत्र क्रमांक 246/वाचक/2026 के अनुसार, मौके पर आवेदक के तीन किरायेदार निवास कर रहे हैं, जिनका दरवाजा और आने-जाने का रास्ता विवादित भूमि की ओर से है। आवेदक के मकान के पूर्व दिशा की ओर डी.सी. रोड स्थित है। किरायेदार के उपयोग का रास्ता रहा है और किरायेदार लंबे समय से उसका उपयोग करते आ रहे हैं। इसलिए उसे अचानक निजी रास्ता बताकर किरायेदारों के उपयोग पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

एआई से फोटो एडिट कर भ्रम फैलाया जा रहा

गणेश सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ समाचारों में एआई तकनीक की मदद से फोटो एडिट कर भ्रामक प्रस्तुति दी गई। उन्होंने कहा कि यह पत्रकारिता की मूल भावना के विपरीत है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।उन्होंने कहा कि बिना दस्तावेजों की जांच, बिना दोनों पक्षों का पक्ष लिए और बिना वर्तमान न्यायालयीन स्थिति समझे समाचार प्रकाशित करना गैर-जिम्मेदाराना कार्य है। ऐसी एकपक्षीय रिपोर्टिंग का असर पूरे पत्रकार जगत की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने मांगी निष्पक्ष जांच

मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा और तनाव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।गणेश सिंह ने कहा कि यदि किसी पक्ष को कोई आपत्ति है तो उसके लिए न्यायालय और प्रशासनिक प्रक्रिया उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा और उससे पहले किसी को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा।

अधूरे ज्ञान वाले पोर्टल संचालकों से शहरवासी परेशान

सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते दौर में शहर में ऐसे कई पोर्टल संचालक सक्रिय हो गए हैं, जिनके पास न पत्रकारिता का अनुभव है और न ही तथ्यों की समझ। अधूरी जानकारी, अपुष्ट खबरें और सनसनी फैलाने वाली पोस्टों के कारण आम लोग परेशान हैं।

शहर के कई नागरिकों का कहना है कि कुछ पोर्टल संचालक बिना पुष्टि किए खबरें प्रसारित कर देते हैं, जिससे लोगों की छवि प्रभावित होती है और समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। कई मामलों में छोटी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है, जबकि वास्तविक तथ्यों की अनदेखी कर दी जाती है।

स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जताई है कि ऐसे पोर्टल केवल व्यूज और वायरल होने की होड़ में पत्रकारिता की मर्यादा भूलते जा रहे हैं। कई बार प्रशासनिक मामलों, कानून व्यवस्था और सामाजिक घटनाओं पर अधूरी जानकारी डालकर लोगों में अनावश्यक भय और विवाद की स्थिति बना दी जाती है।


यह इनके आवेदक है जिनके लिए इन्होंने खबर बनाया है 

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