अंबिकापुर में रिंग बांध तालाब पर अवैध अतिक्रमण का खुलासा, फर्जी दस्तावेजों से नामांतरण का आरोप

अंबिकापुर में रिंग बांध तालाब पर अवैध अतिक्रमण का खुलासा, फर्जी दस्तावेजों से नामांतरण का आरोप


  • रिंग बांध तालाब के जल भराव क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण का मामला उजागर
  • फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संदिग्ध नामांतरण का आरोप
  • प्रशासन से FIR दर्ज करने और नामांतरण निरस्त करने की मांग
  • तालाब का क्षेत्रफल 6.25 एकड़ से घटकर मात्र 0.57 एकड़ रह गया
  • पर्यावरणीय संतुलन और जल संकट पर खतरे की आशंका

⚠️ विवाद का खुलासा

अंबिकापुर, 26 अप्रैल 2026 – नगर निगम क्षेत्र के रिंग रोड स्थित प्रसिद्ध रिंग बांध तालाब पर अवैध अतिक्रमण और शासकीय अभिलेखों में हेराफेरी का गंभीर मामला सामने आया है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि तालाब के जल भराव क्षेत्र को मिट्टी से पाटकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण कराया गया है।



📑 आरोप और दस्तावेजों में हेराफेरी

आरोप है कि अतिक्रमणकारी ने स्वयं को भूमि का स्वामी बताते हुए तालाब की भूमि पर कब्जा कर लिया और संदिग्ध नामांतरण करा लिया।मूल रूप से 6.25 एकड़ निस्तार भूमि वाले तालाब का क्षेत्रफल अब मात्र 57 डेसिमल (0.57 एकड़) रह गया है।
जनवरी 2026 में बची हुई भूमि की भी रजिस्ट्री कर दी गई।
सबसे गंभीर आरोप फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्रों को लेकर लगाया गया है।एक ही व्यक्ति की मृत्यु दो अलग-अलग तिथियों और स्थानों पर दर्ज की गई, जिससे दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।



👥 प्रशासन से मांग

स्थानीय कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर सरगुजा से मांग की है कि—

  • फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किए गए नामांतरण को तुरंत निरस्त किया जाए।
  • दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • तालाब के जल भराव क्षेत्र को पुनर्जीवित कर प्राकृतिक स्वरूप में बहाल किया जाए।

🌍 पर्यावरणीय खतरा

रिंग बांध तालाब अंबिकापुर शहर के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे अतिक्रमण से न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि शहर में बाढ़ और जल संकट की स्थिति भी पैदा हो सकती है।
लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि तालाबों और जल भराव क्षेत्रों को बचाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।


📍 अंबिकापुर का यह मामला न केवल अवैध अतिक्रमण और दस्तावेजी हेराफेरी का उदाहरण है, बल्कि शहर के प्राकृतिक जल संसाधनों पर गंभीर खतरे की चेतावनी भी है।

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