- अंबिकापुर में विश्व पशु चिकित्सा दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित
- पशु चिकित्सकों को मूक प्राणियों का सच्चा संरक्षक बताया गया
- पशुधन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार स्तंभ माना गया
- पशु कल्याण और संरक्षण के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन
⚠️ कार्यक्रम का आयोजन
अंबिकापुर, – राजमोहिनी कृषि महाविद्यालय, अजिरमा (अंबिकापुर) में विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पशु चिकित्सक, विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे।
📑 पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मानव सभ्यता के आरंभ से ही पशु हमारे जीवन का अभिन्न अंग रहे हैं।
पशुओं का संरक्षण और संवर्धन न केवल सांस्कृतिक विरासत का आधार है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमुख स्तंभ भी है।
पशुपालन आज ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है, ऐसे में पशु चिकित्सकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
👥 पशु चिकित्सकों का योगदान
पशु चिकित्सकों को समाज के मूक प्राणियों का सच्चा संरक्षक बताया गया।
उनकी सेवा, समर्पण और करुणा से न केवल पशुओं का जीवन सुरक्षित होता है, बल्कि यह मानवता के प्रति भी एक महान योगदान है।
कार्यक्रम में पशुधन विकास विभाग द्वारा मूक प्राणियों के स्वास्थ्य, टीकाकरण और संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पशु चिकित्सकों और क्षेत्र सहायकों को सम्मानित किया गया।
📑 पशु कल्याण का संकल्प
पशु पुनर्वास केंद्रों और गोशालाओं में कार्यरत कर्मठ व्यक्तियों, जो निराश्रित, घायल और बीमार पशुओं की सेवा में अपना जीवन समर्पित करते हैं, उनके कार्यों की सराहना की गई।
कार्यक्रम का समापन पशु कल्याण और संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ।
सभी उपस्थितजनों ने पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और उनकी देखभाल के महत्व को आत्मसात करने का संदेश दिया।
📍 विश्व पशु चिकित्सा दिवस पर अंबिकापुर में आयोजित यह कार्यक्रम पशुधन संरक्षण और पशु चिकित्सकों की भूमिका को सम्मानित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की अहमियत को रेखांकित करता है।