पिता को खोने के गम में भी मानवता की मिसाल – जायसवाल परिवार ने कराया नेत्रदान, दो नेत्रहीनों को मिलेगी रोशनी

पिता को खोने के गम में भी मानवता की मिसाल – जायसवाल परिवार ने कराया नेत्रदान, दो नेत्रहीनों को मिलेगी रोशनी

  • स्वर्गीय कौन्तेय जायसवाल ने वर्ष 1986 में नेत्रदान का संकल्प लिया था।
  • निधन के बाद परिजनों ने उनकी इच्छा पूरी करते हुए नेत्रदान कराया।
  • नेत्रदान पखवाड़े के दौरान जिला नोडल अधिकारी डॉ. रजत टोप्पो के मार्गदर्शन में प्रक्रिया पूरी हुई।
  • पुत्र अजय जायसवाल की पहल से नेत्रदान सम्पन्न।
  • एक नेत्रदान से दो नेत्रहीनों को दृष्टि मिलेगी।

अंबिकापुर, – शोक की घड़ी में भी मानवता की मिसाल पेश करते हुए जायसवाल परिवार ने अपने दिवंगत पिता कौन्तेय जायसवाल की अंतिम इच्छा पूरी की। वर्ष 1986 में उन्होंने नेत्रदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद परिवार ने उनकी इच्छा के अनुरूप नेत्रदान कराया।

यह नेत्रदान नेत्रदान पखवाड़े के दौरान जिला नोडल अधिकारी अंधत्व एवं अल्पदृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम डॉ. रजत टोप्पो के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।

स्वर्गीय कौन्तेय जायसवाल के पुत्र अजय जायसवाल ने पहल करते हुए नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कराई। इस नेत्रदान से दो नेत्रहीनों को दृष्टि प्राप्त होगी और उनकी जिंदगी में नई रोशनी आएगी।

जायसवाल परिवार का यह कदम समाज के लिए प्रेरणादायी है, जो दिखाता है कि व्यक्तिगत गम के बीच भी दूसरों की जिंदगी संवारने का संकल्प लिया जा सकता है।

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