- डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा श्री राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री रितेश चौधरी के नेतृत्व में कार्यक्रम।
- महिला कॉलेजों की छात्राओं, महिला सामुदायिक समूहों और संगठनों से जुड़ी महिलाओं को साइबर सुरक्षा की जानकारी।
- स्मार्टफोन प्राइवेसी, सोशल मीडिया सुरक्षा, संदिग्ध लिंक से बचाव और शिकायत प्रक्रिया पर विशेष जोर।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 की जानकारी दी गई।
अंबिकापुर, – सरगुजा पुलिस द्वारा चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान के अंतर्गत इस सप्ताह महिलाओं और छात्राओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं और छात्राओं को स्मार्टफोन की प्राइवेसी सेटिंग्स, सुरक्षित ब्राउज़िंग, सोशल मीडिया अकाउंट्स की सुरक्षा और संदिग्ध लिंक से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए गए।
- स्मार्टफोन प्राइवेसी: ऐप्स को अनावश्यक परमिशन न देने और इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग करने की जानकारी।
- सोशल मीडिया सुरक्षा: फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करने और प्रोफाइल लॉक करने की सलाह।
- फिशिंग से बचाव: लॉटरी, इनाम, मुफ्त रिचार्ज या फर्जी नौकरियों के नाम पर आने वाले संदिग्ध लिंक न खोलने की चेतावनी।
- व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा: निजी तस्वीरें, लाइव लोकेशन, आधार नंबर और बैंक विवरण साझा न करने की सलाह।
- ऑनलाइन उत्पीड़न से बचाव: साइबर स्टॉकिंग, बुलिंग और अवांछित संदेशों से निपटने के लिए ब्लॉक और रिपोर्ट टूल्स का उपयोग।
शिकायत प्रक्रिया
सत्र को संवादात्मक रखा गया, जहाँ छात्राओं ने अपने सवाल और अनुभव साझा किए। पुलिस अधिकारियों ने सरल भाषा में समाधान दिया। महिलाओं को बताया गया कि किसी भी प्रकार के साइबर अपराध या ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में वे बिना डरे पुलिस से संपर्क करें।
उन्हें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 की जानकारी दी गई, जहाँ पीड़िता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है।
सरगुजा पुलिस ने स्पष्ट किया कि डिजिटल युग में सुरक्षित व्यवहार ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।