30 वर्षों से अंधेरे में पर्यटन स्थल रनघाघ, बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे पर्यटक और रखवाले

30 वर्षों से अंधेरे में पर्यटन स्थल रनघाघ, बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे पर्यटक और रखवाले

  • रनघाघ पर्यटन स्थल 30 साल से प्रकाश व्यवस्था से वंचित है।
  • शाम ढलते ही पूरा स्थल अंधेरे में डूब जाता है।
  • रखवाली करने वाले कर्मचारी मोबाइल और टॉर्च के सहारे ड्यूटी निभा रहे हैं।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग से महज 2 किलोमीटर दूर स्थित है रनघाघ।
  • स्थानीय लोगों ने प्रकाश, सुरक्षा और स्वच्छता जैसी सुविधाओं की मांग की है।

अंबिकापुर, शहर के नजदीक स्थित प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल रनघाघ आज भी बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है। सरकारें बदलीं, जनप्रतिनिधि बदले और विकास के दावे भी हुए, लेकिन रनघाघ की तस्वीर वर्षों बाद भी बदलती नजर नहीं आ रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुमेरपुर (चेन्द्रा) से महज करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रनघाघ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में लोग घूमने और प्रकृति का आनंद लेने पहुंचते हैं। बावजूद इसके शाम ढलते ही पूरा पर्यटन स्थल अंधेरे में डूब जाता है।

रनघाघ में सबसे बड़ी समस्या प्रकाश व्यवस्था का अभाव है। शाम होते ही यहां अंधेरा छा जाता है। आसपास के क्षेत्रों और जंगल-पहाड़ी इलाकों तक बिजली की सुविधा पहुंच चुकी है, लेकिन पर्यटन स्थल रनघाघ में अब तक पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि जब पर्यटन स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण पर लगातार जोर दिया जा रहा है, तो रनघाघ जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल पर बुनियादी प्रकाश व्यवस्था तक क्यों नहीं हो पाई।

बताया जा रहा है कि रनघाघ की देखरेख और रखवाली करने वाले कर्मचारी वर्षों से रात के समय मोबाइल की रोशनी और टॉर्च के सहारे अपनी ड्यूटी निभाने को मजबूर हैं। करीब तीन दशक से यहां रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस पर्यटन स्थल की सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी विभागीय स्तर पर है, वहां एक सामान्य स्ट्रीट लाइट या पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकी।

वन विभाग और प्रशासन की ओर से प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों को विकसित करने, सुविधाएं बढ़ाने और पर्यटकों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराने की योजनाएं संचालित की जाती हैं। लेकिन रनघाघ की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रनघाघ को यदि बेहतर तरीके से विकसित किया जाए और यहां प्रकाश, सुरक्षा, स्वच्छता, बैठने तथा अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो यह क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से और अधिक आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

रनघाघ में लंबे समय से चली आ रही मूलभूत समस्याओं को लेकर अब स्थानीय लोगों और पर्यटकों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर तत्काल प्रकाश व्यवस्था सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएं, ताकि पर्यटकों के साथ-साथ वहां तैनात कर्मचारियों को भी अंधेरे में काम करने की मजबूरी से राहत मिल सके। तीन दशक से पर्यटन स्थल रनघाघ का अंधेरे में रहना आखिर किसकी जिम्मेदारी है? यह सवाल अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने भी खड़ा है।

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