- महादेव स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मिली नई राह
- पशु सखी के रूप में कार्य कर हर माह 10–15 हजार रुपये की आय
- बकरियों की देखभाल, टीकाकरण और स्वास्थ्य प्रबंधन में ग्रामीणों को कर रहीं जागरूक
- कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मविश्वास और सम्मान हासिल किया
- बिहान योजना से खेत में बोर खुदवाकर धान की खेती शुरू, भविष्य में सब्जी उत्पादन की योजना
📰 विस्तृत विवरण
अंबिकापुर, – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़कर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। इसी का प्रेरक उदाहरण हैं विकासखंड अंबिकापुर की तैलासो राजवाड़े, जो पिछले दो वर्षों से पशु सखी के रूप में कार्य करते हुए आत्मनिर्भर बनी हैं।
🐐 पशुपालकों की साथी
तैलासो राजवाड़े बकरियों की देखभाल, टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक दवाइयों की जानकारी उपलब्ध कराती हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिमाह 10 से 15 हजार रुपये की आय होती है, जिससे परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल रही है।
👩👧👦 परिवार की जिम्मेदारी
तैलासो के तीन बच्चे हैं – बड़ा बेटा कक्षा 12वीं, दूसरा 10वीं और सबसे छोटा 8वीं में अध्ययनरत है। पहले आर्थिक स्थिति कमजोर होने से कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब अपनी आय से वे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा कर पा रही हैं।
🎓 प्रशिक्षण और भविष्य की योजना
उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त किया, जहां पशुपालन और बकरियों के स्वास्थ्य प्रबंधन की जानकारी दी गई। बिहान योजना से मिली सहायता के आधार पर उन्होंने खेत में बोर खुदवाकर धान की खेती शुरू की है। भविष्य में वे सब्जी उत्पादन कर आय में और वृद्धि करने की योजना बना रही हैं।
🌟 आत्मनिर्भरता और सम्मान
तैलासो ने कहा कि बिहान योजना से जुड़कर उन्हें आत्मविश्वास, सम्मान और आर्थिक स्वावलंबन मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में प्रभावी भूमिका निभा रही है।
📍 तैलासो राजवाड़े की कहानी यह साबित करती है कि बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में नई रोशनी और आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त कर रही है।