- लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल और प्रयाग मेडिकल-व प्रयाग पॉलीक्लिनिक और डायग्नोस्टिक पर उठे गंभीर सवाल
- सड़क पर पार्किंग से बिगड़ रही यातायात व्यवस्था, जांच बनी औपचारिकता ?
अंबिकापुर।
गुदरी चौक विजय मार्ग स्थित लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल इन दिनों कई गंभीर आरोपों और सवालों के घेरे में है। अस्पताल पर नर्सिंग होम एक्ट के नियमों की अनदेखी, भ्रामक प्रचार, मूलभूत सुविधाओं में कमी, फायर सेफ्टी में लापरवाही और आवासीय अनुमति पर व्यावसायिक संचालन जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अस्पताल के समीप संचालित प्रयाग मेडिकल एवं पैथोलॉजी लैब को लेकर भी यातायात अव्यवस्था और पार्किंग समस्या को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
बड़े-बड़े दावे, लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता पर सवाल
अस्पताल के बाहर लगे फ्लेक्स, बोर्ड और प्रचार सामग्री में अत्याधुनिक मशीनें, विशेषज्ञ डॉक्टरों की लंबी सूची और हर बीमारी के इलाज का दावा किया जाता है। मरीजों को दिए जाने वाले फोल्डर एवं दस्तावेजों में भी कई विशेषज्ञ चिकित्सकों के नाम दर्ज बताए जाते हैं। लेकिन कई मरीजों और परिजनों का कहना है कि जिन डॉक्टरों के नाम प्रचार में दिखाए जाते हैं, उनकी नियमित उपलब्धता स्पष्ट नहीं रहती। अस्पताल परिसर में डॉक्टरों की ड्यूटी सूची, ओपीडी समय और विशेषज्ञों की उपलब्धता संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।सूत्रों का दावा है कि कई चिकित्सक “ऑन कॉल” व्यवस्था में जुड़े हैं, जबकि प्रचार सामग्री में उनकी स्थायी उपलब्धता जैसा माहौल प्रस्तुत किया जाता है।
पैथोलॉजी लैब संचालन के नियम क्या कहते हैं?
जानकारों के अनुसार छत्तीसगढ़ में पैथोलॉजी लैब संचालन से जुड़े प्रमुख नियम सामान्यतः ये माने जाते हैं —
- लैब का पंजीयन और लाइसेंस अनिवार्य
- योग्य पैथोलॉजिस्ट की निगरानी
- DMLT/BMLT स्टाफ की नियुक्ति
- रिकॉर्ड और रिपोर्ट सुरक्षित रखना
- बायोमेडिकल वेस्ट नियमों का पालन
- गलत या फर्जी रिपोर्ट पर कार्रवाई
- नर्सिंग होम एक्ट एवं क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट नियमों का पालन
इसके अलावा सरगुजा-अंबिकापुर में सीएमएचओ द्वारा सभी पैथोलॉजी लैब संचालकों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि —
- रिपोर्ट केवल पंजीकृत पैथोलॉजिस्ट की निगरानी में तैयार हों,
- डिजिटल या स्कैन सिग्नेचर मान्य नहीं होंगे,
- मूल हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे,
- नियमों के उल्लंघन पर छत्तीसगढ़ उपचर्यागृह एवं रोगोपचार संबंधी स्थापना अधिनियम 2010 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि संबंधित अस्पताल और पैथोलॉजी संचालन में इन नियमों का कितना पालन हो रहा है। मरीजों और उनके परिजनों को पर्याप्त और पारदर्शी जानकारी नहीं मिलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
आईसीयू से लेकर टॉयलेट तक व्यवस्था पर सवाल
स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार अस्पताल की मूलभूत व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आईसीयू, जनरल वार्ड, टॉयलेट और बाथरूम जैसी सुविधाओं को मानकों के अनुरूप नहीं बताया जा रहा।
यह भी चर्चा है कि अस्पताल का संचालन अलग-अलग हिस्सों में किया जा रहा है। ओपीडी अलग स्थान पर, जांच सुविधा अलग और भर्ती वार्ड अन्य हिस्सों में संचालित बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन सभी हिस्सों के लिए विधिवत अनुमति प्राप्त है या नहीं।
प्रयाग मेडिकल एवं पैथोलॉजी लैब से बढ़ रही अव्यवस्था
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के साथ-साथ प्रयाग मेडिकल एवं पैथोलॉजी लैब के कारण भी क्षेत्र में भीड़ और यातायात दबाव लगातार बढ़ रहा है।दवा खरीदने, जांच कराने और मरीजों को लाने-ले जाने वाले वाहनों के कारण मुख्य सड़क पर कई बार जाम जैसी स्थिति बन जाती है। लोगों का कहना है कि अस्पताल और मेडिकल व्यवसाय के अनुरूप पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था दिखाई नहीं देती, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
आग लग जाए तो जिम्मेदार कौन?
गर्मी के मौसम में लगातार आगजनी की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में अस्पतालों में फायर सेफ्टी व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।लेकिन अस्पताल में पर्याप्त अग्निशमन यंत्र, इमरजेंसी एग्जिट और सुरक्षा संकेतकों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी आपात स्थिति में हादसा हो जाए तो मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
मीडिया के सवालों से क्यों बच रहा प्रबंधन?
जब मीडिया द्वारा अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई तो संचालक डॉ. प्रतीक खरे का पक्ष नहीं मिल सका। आरोप है कि मीडिया की ओर से सवाल पूछे जाने पर सीधे जवाब देने के बजाय कर्मचारियों को आगे कर दिया गया।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल पूरी तरह नियमों के अनुरूप संचालित हो रहा है तो प्रबंधन को खुलकर सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए।
शिकायत के बाद बनी जांच टीम, कार्रवाई अब तक स्पष्ट नहीं
आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता डॉ. डीके सोनी द्वारा अस्पताल के नियम विरुद्ध निर्माण और संचालन को लेकर शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद नगर निगम अंबिकापुर द्वारा 19 मार्च को जांच टीम गठित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
जांच टीम में भवन अधिकारी राजेश कुमार राम, सहायक अभियंता प्रदीप पैकरा, उप अभियंता प्रियंका पटेल, रत्नेश कंवर और प्रेम दुबे को शामिल किया गया था। टीम को सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने पर अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
“आवासीय अनुमति पर अस्पताल संचालन” का आरोप
शिकायत में कहा गया कि संबंधित भूमि पर आवासीय निर्माण की अनुमति दी गई थी, लेकिन वर्तमान में वहां व्यावसायिक गतिविधि के रूप में अस्पताल संचालित किया जा रहा है।भवन अनुमति में सेटबैक, पार्किंग, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अन्य शर्तें भी शामिल थीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन सभी नियमों का पालन किया गया है।
जनता पूछ रही — कार्रवाई कब?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन को पूरे मामले में स्पष्ट स्थिति सामने लानी चाहिए।
लोगों का कहना है कि यदि शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि मरीजों का भरोसा बना रहे और शहर में व्यवस्थित स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित हो सकें।