अंबिकापुर में अनोखी शादी: दुल्हन लेकर आई बारात, दूल्हे की हुई विदाई

अंबिकापुर में अनोखी शादी: दुल्हन लेकर आई बारात, दूल्हे की हुई विदाई


  • सुलपगा गांव में परंपराओं को चुनौती देती अनोखी शादी
  • दुल्हन देवमुनि एक्का बारात लेकर पहुंची दूल्हे बिलासुस बरवा के घर
  • कन्यादान की जगह हुआ "वरदान", दूल्हे की विदाई बनी चर्चा का विषय
  • दुल्हन के पिता ने दूल्हे को घर जमाई बनाकर बेटे की तरह रखने का लिया निर्णय
  • शादी में दहेज की परंपरा नहीं निभाई गई, बाद में "चुमान" रस्म होगी

⚠️ घटना का विवरण

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के ग्रामीण इलाके सुलपगा गांव में एक अनोखी शादी चर्चा का विषय बनी हुई है।
यहाँ परंपराओं को चुनौती देते हुए दुल्हन देवमुनि एक्का बारात लेकर दूल्हे बिलासुस बरवा के घर पहुँची।
मसी परंपरा के तहत विवाह संपन्न हुआ, लेकिन खास बात यह रही कि शादी में कन्यादान की जगह वरदान हुआ और दूल्हे की विदाई की गई।



👥 दूल्हे की विदाई और भावुक पल

जब दुल्हन को दूल्हे का हाथ थमाया गया और देर शाम दूल्हे की विदाई हुई, तो दूल्हा भावुक होकर रो पड़ा।
आमतौर पर विदाई में दुल्हन रोती है, लेकिन इस शादी में दूल्हे की विदाई ने सबको भावुक कर दिया।



🏡 परिवार का निर्णय

दुल्हन के पिता मोहन एक्का ने बताया कि उनके घर में चार बेटियां हैं और कोई बेटा नहीं है।
इसलिए उन्होंने दूल्हे को घर जमाई बनाकर बेटे की तरह रखने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि यह कदम भले समाज को अलग लगे, लेकिन उनके परिवार के लिए यह जरूरी था।


📑 दहेज की परंपरा और रीति-रिवाज

इस शादी में दहेज नहीं दिया गया।
स्थानीय परंपरा के अनुसार बाद में "चुमान" रस्म होगी, जिसमें लड़के पक्ष की ओर से दहेज दिया जाता है।


🎉 बारातियों का अनुभव

गांव के लोगों और बारातियों ने इस शादी को अनोखा अनुभव बताया।
साधू राम टप्पो ने कहा कि आमतौर पर लड़के पक्ष बारात लेकर जाता है, लेकिन यहाँ लड़की पक्ष बारात लेकर आया, जो अपने आप में नई और अलग परंपरा है।


📍 सुलपगा गांव की यह अनोखी शादी समाज में चर्चा का विषय बन गई है। परंपरा के उलट दुल्हन द्वारा बारात लाना और दूल्हे की विदाई होना एक ऐसा अनोखा कदम है, जिसने सबको भावुक कर दिया और सामाजिक सोच को नई दिशा दी।

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