अगर आप अंबिकापुर आ रहे हैं तो तैयार हो जाइए, यहां आपका स्वागत फूलों की माला से नहीं बल्कि गड्ढों के झूलों से होगा। शहर की सड़कों की हालत देखकर कोई भी आसानी से मान जाएगा कि यहां PWD का मतलब “पानी-वा-धूल” है।
इन सड़कों पर गाड़ी चलाना मतलब एक एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसा है — फर्क बस इतना है कि यहां जीतने वाला कोई मेडल नहीं, बल्कि टूटी हुई शॉक एब्जॉर्बर और हड्डियों का फ्री बोनस मिलता है। बारिश होते ही सड़कें ऐसे चमक उठती हैं जैसे किसी पांच सितारा होटल का स्विमिंग पूल हो, फर्क बस इतना है कि यहां स्विमिंग करने से पहले टेटनस का इंजेक्शन जरूर लगवा लेना चाहिए।
अंबिकापुर के लोग अब सड़क और तालाब में फर्क करना भूल चुके हैं। यहां गड्ढों की गहराई मापने के लिए मछुआरे भी पैमाना लेकर आते हैं। स्कूटी चलाने वाले तो बारिश में घर से निकलते समय अपने साथ लाइफ जैकेट रखने लगे हैं।
सबसे अच्छी बात यह है कि यहां की सड़कें आपको ‘नेचर थेरेपी’ भी देती हैं — मिट्टी, पानी और धूल का मुफ्त स्पा ट्रीटमेंट, वो भी बिना किसी बुकिंग के।
नगर निगम और संबंधित विभाग को शायद लगता है कि ये सड़कें किसी "मोन्यूमेंट" की तरह संरक्षित होनी चाहिए, तभी तो मरम्मत का काम इतना दुर्लभ है जैसे किसी म्यूजियम में खजाना देखना।
कुल मिलाकर, अंबिकापुर की सड़कें आपको हर दिन यह याद दिलाती हैं कि जिंदगी में सफर आसान नहीं होता… और अगर सड़क अंबिकापुर की हो, तो सफर बस सफर नहीं, साहसिक यात्रा बन जाता है।