लंबे समय से जमें पटवारियों का किया गया तबादला, एक साथ 83 पटवारियों का किया गया तबादला

लंबे समय से जमें पटवारियों का किया गया तबादला, एक साथ 83 पटवारियों का किया गया तबादला

  • 83 पटवारी का स्थानांतरण लिस्ट दिखा लगा सरगुजा में कुछ बदलाव होगा पर यह लोग बहुत बड़ी पहुंच रखते हैं जो शहर से लगे इलाकों में शहर में पदस्थ थे वे बाहर तो जाएंगे नहीं अपना जुगाड़ लगा लेंगे जो दो-चार दिन में स्पष्ट रूपरेखा बन जाएगी कौन कहां है और उनका स्थानांतरण नहीं होता जो बांग्ला की देखरेख करते हैं अब आगे देखिए क्या होता है सूची तो बन गई है
  • क्या सरगुजा कलेक्टर द्वारा जारी पटवारी ट्रांसफर लिस्ट में क्या कोई पटवारी अपना जुगाड़ लगा सकता है देखना हैं आगे क्या होता है 
  • क्योंकि पटवारी की पहुंच बहुत ज्यादा कई बड़े नेताओं तक है 
  • सरगुजा अंबिकापुर में बिल्डरों एवं भूमाफियाओं से अच्छी सांठगांठ रखते हैं पटवारी जिनकी पहुंच बहुत ऊपर होती हैं 
  • इनकी सांठगांठ बहुत बड़े-बड़े स्तर तक होती है क्यों की कई भूमि माफियाओं जो अपनी बहुत बड़ी पहुंच रखते हैं उनके कहने पर सब काम हो जाएगा इनका जो स्थानांतरण कई वर्षों से नहीं हुआ था उसे सरगुजा कलेक्टर ने किया है क्या यह गैर रहेगा या यह भी पहुंच की भेंट चढ़ जाएगा 
  • क्या 83 पटवारी का स्थानांतरण जिन-जिन स्थानों में किया गया है क्या वे उन उन स्थानों में अपनी सेवा देंगे या जुगाड़ लगाएंगे देखना है क्या होता है 
  • कई वर्षों के बाद हुए पटवारी स्थानांतरण मे क्या शहर में पदस्थ पटवारी जाएंगे ग्रामीण आंचल में 
  • कुछ ना कुछ बहाना तो कर ही लेंगे साहब अपनी पहुंच बहुत ऊपर तक है स्थानांतरण तो होते रहते हैं जुगाड़ भी चलता रहता है 
  • क्या सरगुजा कलेक्टर इस स्थानांतरण जिन-जिन सूची जो जारी की गई है क्या वह यथावत रहेगी या जुगाड़ चलेगा 
  • सूत्रों की माने तो स्थानांतरण सूची जारी होते ही आला अधिकारियों एवं नेताओं के घर एवं भूमाफियाओं के संपर्क में जुगाड़ लगाते रहे 
  • हस्तांतरण सूची में पहुंच रखने वाले अपना स्थान हल्का चेंज कर लेंगे पर रहेंगे शहर से लगे क्षेत्रों में 
  • आम जनता को पारदर्शिता का इंतजार क्या हो पाएगा आम जनता का सपना पूरा या वही रहेग ढर्रा
  • शहर में जमे पटवारियों को रूरल इलाक़ो का दिया गया जिम्मा
  • कलेक्टर अजित वसंत ने किया तबालदा आदेश जारी


सरगुजा कलेक्टर द्वारा जारी 83 पटवारियों की स्थानांतरण सूची को लेकर जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है। वर्षों बाद बड़े पैमाने पर हुए इस फेरबदल से प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या सूची यथावत लागू हो पाएगी या प्रभावशाली पटवारी अपनी पहुंच के दम पर फेरबदल करा लेंगे।



स्थानीय सूत्रों का कहना है कि शहर और शहर से लगे क्षेत्रों में लंबे समय से पदस्थ कुछ पटवारियों की पकड़ नेताओं और प्रभावशाली लोगों तक बताई जाती है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि सूची जारी होने के बाद कई स्तरों पर संपर्क साधे जा रहे हैं, ताकि पदस्थापना में मनचाहा परिवर्तन कराया जा सके। खासकर वे पटवारी, जिनका वर्षों से तबादला नहीं हुआ था, उनके ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तव में कार्यभार संभालने को लेकर निगाहें टिकी हुई हैं।


जनता के बीच यह भी चर्चा है कि बिल्डरों और कथित भूमाफियाओं से करीबी रखने वाले कुछ पटवारी शहर से दूर जाने से बचने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर प्रशासन की मंशा व्यवस्था में पारदर्शिता और संतुलन लाने की बताई जा रही है। अब देखना यह होगा कि जारी सूची पूरी तरह लागू होती है या प्रभाव के चलते कुछ नामों में बदलाव देखने को मिलता है।

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