अम्बिकापुर/लखनपुर। लखनपुर विकासखंड में पदस्थ शिक्षक एलबी राजेश सिंह के खिलाफ तीन संतान होने को लेकर की गई शिकायत अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। मामले में शिकायतकर्ता तथाकथित भाजपा कार्यकर्ता निशांत सिंह उर्फ गोल्डी द्वारा दिए गए आवेदन को लेकर शिक्षा विभाग और स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।बताया जा रहा है कि बिना नियमों की पूरी जानकारी लिए की गई शिकायत ने अब शिकायतकर्ता की मंशा और समझ दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं शिक्षक राजेश सिंह ने स्पष्ट कहा है कि उनके तीनों बच्चों के जन्म से किसी भी वैधानिक नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है और उनके खिलाफ की गई शिकायत तथ्यों से परे है।
क्या है पूरा मामला?
कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी लखनपुर द्वारा जारी पत्र के अनुसार,तथाकथित भाजपा कार्यकर्ता निशांत सिंह उर्फ गोल्डी ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि शिक्षक राजेश सिंह ने शासकीय सेवा में रहते हुए 26 जनवरी 2001 के बाद तीन संतान प्राप्त की है, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम 1961 के नियम 6 उपनियम (6) का उल्लंघन है। शिकायत के आधार पर शिक्षक राजेश सिंह को अपने बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र एवं संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु कार्यालय बुलाया गया।
लेकिन पूरे मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब संबंधित नियमों और संशोधन की जानकारी सामने आई।
2017 में खत्म हो चुका है “दो से अधिक संतान” वाला प्रावधान
दस्तावेजों के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2017 में अधिसूचना जारी कर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम 1961 के नियम 6 के उपनियम (6) को समाप्त कर दिया गया था। इस संशोधन के बाद “दो से अधिक जीवित संतान” को लेकर नियुक्ति अपात्रता का प्रावधान समाप्त हो चुका है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि शिक्षक (पंचायत) संवर्ग की नियुक्तियों में यह प्रावधान लागू नहीं होगा। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि जब संबंधित नियम का प्रावधान वर्षों पहले समाप्त हो चुका है, तो फिर उसी आधार पर शिकायत किस जानकारी और मंशा के तहत की गई?
“खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” जैसी चर्चा
स्थानीय स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। लोग इसे “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” वाली स्थिति बता रहे हैं। चर्चा यह भी है कि जमीन विवाद और आपसी रिश्तेदारी की खटास के बाद यह शिकायत सामने आई। आरोप लगाए जा रहे हैं कि निजी विवाद में दबाव बनाने और छवि धूमिल करने के उद्देश्य से अधूरी जानकारी के आधार पर शिकायती पत्र दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायत करने से पहले नियमों का अध्ययन कर लिया जाता, तो ऐसी स्थिति शायद नहीं बनती।
“नियम जाने बिना शिकायत करना गैरजिम्मेदाराना”
शिक्षा विभाग से जुड़े कुछ जानकारों का कहना है कि किसी भी शासकीय कर्मचारी के खिलाफ शिकायत करना गंभीर विषय होता है। ऐसे मामलों में नियमों की सही जानकारी और वैधानिक स्थिति समझना जरूरी होता है। बिना संशोधित नियमों को देखे शिकायत करना न केवल गैरजिम्मेदाराना कदम माना जा रहा है, बल्कि इससे विभागीय समय और प्रशासनिक प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
राजेश सिंह ने रखा अपना पक्ष
शिक्षक राजेश सिंह ने कहा कि:
"मेरे तीनों बच्चों के जन्म से किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। शासन द्वारा संबंधित प्रावधान पहले ही समाप्त किया जा चुका है। मेरे खिलाफ की गई शिकायत तथ्यहीन और दुर्भावनापूर्ण है। मैं सभी दस्तावेज विभाग के समक्ष प्रस्तुत करूंगा।” उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग निजी कारणों से उनकी छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सत्य सामने आने के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
अब शिकायतकर्ता पर उठ रहे सवाल
पूरे मामले में अब शिकायतकर्ता तथाकथित भाजपा कार्यकर्ता निशांत सिंह उर्फ गोल्डी की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नियमों की अधूरी जानकारी के आधार पर दिया गया यह शिकायती पत्र अब उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि जनहित और वैधानिक मामलों में गंभीरता आवश्यक है। निजी विवादों को प्रशासनिक शिकायत का रूप देना लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया दोनों के लिए उचित नहीं माना जा सकता।
जनहित में सभी शिक्षक वर्ग के लिए प्रकाशित